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भारत का संविधान दिन,उसकी वर्तमान प्रासंगिकता और ऐतिहासिक महत्त्व। भाग-१


जैसा की आप सब जानतें है की,आज 26 नवंबर को हमारा राष्ट्रीय त्यौहार संविधान दिन है।तो क्या आप जानते है की संविधान दिन का ऐतिहासिक महत्त्व और हमारा संविधान कैसें बना,क्यों बनाया,किसने बनाया,इसे बनानें में कितना वक्त लगा और हमारा संविधान कब अंमल में आया और हमारें दैनंदिन जीवन में संविधान का कितना महत्त्व और कितनी प्रासंगिकता है?आईए आज हम इस पर नजर डालते है।


संविधान वो किताब है,जिस पर हमारा पुरा भारत देश आज भी एकता कें रूप में विश्व के आगे खडा है।

संविधान वो किताब है,जिससे हमारें भारत देश में अलग अलग धर्म, मजहब,जातीयाँ,पंथ होते हुए भी एक समानता है।

संविधान वो किताब है,जिसने हमें बोलने का और देश में कही भी घुमने-फिरने की आझादी दियी है।

संविधान वो किताब है,जिससे हम किसी भी धर्म का प्रचार और प्रसार कर सकते है।कोई भी धर्म अपने स्वैच्छा सें अपना सकते है।

संविधान वो किताब है,जिससे भारत का हर नागरिक देश कें किसी भी राज्य में जाकर रह सकता है।कोई भी किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं है।

संविधान वो किताब है,जिससे एक गरिब घर का आदमी भी देश का सबसे बडे प्रधानमंत्री पद तक जा सकता है।जैसे हमारें वर्तमान प्रधानमंत्री।

संविधान वो किताब है,जिसने हजारों सालों से दबें-कुचलें समाज के एक बहुत बडे समुदाय को बराबर आनें का और समाज के मुख्य प्रवाह में आने का अवसर दिया है।

संविधान वो किताब है,जो समाज में बराबरी की व्यवस्था को बनाए रखता है और भेदभाव को दुर करता है।

संविधान वो किताब है,जिसने हजारो सालों से चलती आयी Untouchability की अमानवीय प्रथा को जड सें खत्म किया है।

संविधान वो किताब है,जिसनें हमारे भारत देश की 70 साल से चलती आयी अपनी आझादी बनाके रखी है।

संविधान वो किताब है,जिससें धार्मिक अल्पसंख्याकों को अपने विशेष अधिकार और सुरक्षितता दियी है।

संविधान वो किताब है,जिसनें हमें धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद सिखाया है।

संविधान वो किताब है,जिसकी वजह सें हम सब अलग अलग धर्म और अलग अलग जातीयों के होने के बावजुद भी हम सब आपस में भाईचारा बनाके रह सकते है।

संविधान वो किताब है,जो हमें प्राथमिक शिक्षा Primary Education फ्री में देता है।

संविधान वो किताब है,जिससें हम सब एकसमान रुप सें कानुन के दायरे में रहकर सत्ताधारीयों के उपर भी अंकुश रख सकते है।

संविधान के प्रास्ताविक में 'हम भारत के लोग' इस तरह का शब्दप्रयोग किया है।उसके अनुसार ही सताधारीयों से पहले हम आते है।भारत की जनता को संविधान ने प्राथमिकता दियी है।चाहे वे किसी भी जाती या धर्म के हो।

संविधान वो किताब है,जो इन्सान के साथ-साथ पशु,पेड,पौधे,जंगल,नदीयाँ,झरनें,राष्ट्रीय स्मारक,ऐतिहासिक वास्तूओं का भी जतन करने की कानुनी सिख देता है।और उसका उलंघन करने पर सजा भी देता है।

संविधान वो किताब है,जो हमें अपने अपने धर्म का पालन,उसके त्यौहार मनानें की भी स्वतंत्रता देता है।

संविधान वो किताब है,जो हमें समता,स्वतंत्रता, एंंवम बंधुभाव भी सिखाता है।

संविधान वो किताब है,जो हमें अपने देश को एक मजबूत,सशक्त और विकसित राष्ट्र कें रूप में खडा करनें की सिख देता है।

संविधान वो किताब है,जिसके हर नियम, कानुन,अनुच्छेद सिर्फ और सिर्फ मानवहीत में है।

तो दोस्तों ऐसा है हमारा गौरवशाली भारतीय संविधान।यही संविधान का संक्षिप्त में परिचय है।

और इस संविधान के पिता,रचयीता,निर्माता बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर है।

दोस्तों यह था हमारे संविधान का संक्षिप्त में परिचय।वैसे तो यह एक बहुतही बृहद किताब है,और दुनिया का सबसे बडा संविधान हमारे भारत देश का है।तो इसका पुरा परिचय देना बहुतही मुश्कील है।क्यो की इसे बनानें में भी काफी वक्त लगा है।क्यों की हमारे देश में काफी जादा धर्म, मजहब,अलग अलग सेंकडो जातीयाँ थी तो इन सबको एकरूप में बांधना बहुतही जटील और चुनौतीपुर्ण काम था।पर हमारें संविधान निर्माताओं ने यह काम सफल बना दिया और हमारे देश को एक नयी शक्ती प्रदान कियी।

संविधान की प्रमुख समितीयाँ एवम उनके अध्यक्ष:

1.प्रारूप समिती-Drafting Committee
अध्यक्ष-बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर.

2.संचालन समिती-Steering Committee
अध्यक्ष-डॉ. राजेंद्र प्रसाद

3.आवास समिती-House Committee
अध्यक्ष-बी.पटाभी सीतारामय्या

4.संघीय शक्तीयों संबंधी समिती-Union Powers Committee.
अध्यक्ष-पंडित जवाहरलाल नेहरु

5.संघीय संविधान समिती-Union Constitution Committee-अध्यक्ष-जवाहरलाल नेहरू

6.वित्त एवमं स्टाफ समिती-Finance and Staff Committee.अध्यक्ष-डॉ. राजेंद्र प्रसाद.

7.मौलिक अधिकार संबंधी सलाहकार समिती-
Advisory Committee on Fundamental Rights.अध्यक्ष- सरदार वल्लभभाई पटेल.

8.राज्यों सबंधी समिती-States Committee
अध्यक्ष-जवाहरलाल नेहरू.

9.प्रक्रिया विषयक नियमों संबंधी समिती-
Committee on the Rules of Procedure.
अध्यक्ष-राजेंद्र प्रसाद

10.प्रत्यय पत्र संबंधी समिती-Credential Committee-अध्यक्ष-अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर

11.कार्य संचालन संबंधी समिती-Order of Business Committee-अध्यक्ष- के.एम.मुन्शी

12.राष्ट्रीय ध्वज संबधी तदर्थ समिती-Ad hoc Committee on the National flag
अध्यक्ष-राजेंद्र प्रसाद

13.संविधान सभा के कार्यकरण संबंधी समिती-
Committee on the functions of the Constituent Assembly-
अध्यक्ष-जी.वी.मावलकर

14.झेंडा समिती-Flag Committee
अध्यक्ष-जी.बी.कृपलानी

तो दोस्तों ये थी हमारे संविधान सभा की कुछ प्रमुख समितीया और उनके अध्यक्ष।

लेकीन इनमें से सबसे उपर जो प्रारूप समिती थी वह सबसे महत्वपूर्ण समिती थी जिसके अध्यक्ष बाबासाहब डॉ. बी.आर.आम्बेडकर साहब थे।

1.प्रारूप समिती Drafting Committee
अध्यक्ष:-बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर

दोस्तों यह प्रारूप समिती वह समिती थी।जिसके उपर भारत का नया संविधान बनानें की जिम्मेवारी सोपीं गयी थी।यहा ध्यान देनेवाली बात यह है की इस समिती का गठन आजादी के बाद याने 29 अगस्त 1947 को किया गया था।मतलब आजादी मिलने के चौदाह दिन बाद किया गया था।यह महत्वपूर्ण बात हमें पता होनी चाहीए।

प्रारुप समिती में कुल 7 सदस्य Members थे।

1.बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर
2.एन.गोपालस्वामी अयंगार
3.अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
4.डॉ. के.एम.मुन्शी
5.सैय्यद मोहम्मद सादुल्लाहं
6.एन.माधवराव(इन्होंनें बी.एल.मित्तर की जगह ली)
7.टी.टी.कृष्णामाचारी(इन्होंनें डी.पी.खेतान की जगह ली -उनके देहांत के बाद).

तो यह थी हमारी प्रारुप समितीयाँ।और उनके सदस्य

-संविधान लिखने में कितना वक्त लगा?इसका जवाब है,दो साल ग्यारह महीनें अठारांं दीन।इतना वक्त लगा हमारा संविधान बनानें में।इस संविधान का प्रारुप बनाने की जिम्मेवारी Drafting Committee की थी।इसमें जीतने भी सदस्य थे उन्होनें शुरूवाती दौर में बहुतही मेहनत की लेकीन वे अंत तक नहीं बनें रहै।आखीर में संविधान बनानें का पुरा भार,जिम्मेवारी बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर पर पडी।और उन्होनें अपनी सेहत की भी परवाह किये बगैर भारत का संविधान बनाया और राष्ट्र को 26 नवंबर 1949 को एक मजबूत और सशक्त संविधान दिया।इसी दिन को आज हम पुरे भारत वर्षे में संविधान दिन के तौर पर मना रहै है।इसलिए हम भारत के लोग उन्हें संविधान के पिता कहते है।

संविधान का पुरा भार बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर के उपर पडा इस बात की कबुली संविधान सभा के ही एक सदस्य जो की प्रारूप समिती के भी एक प्रमुख सदस्य थे।उन्होनें अपनें ऐतिहासिक भाषन में दी है।संविधान लिखने की पुरी जिम्मेवारी बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर पर ही क्यो पडी?क्यो की प्रारूप समिती में जितने भी सदस्य थे उनकी संख्या सात थी।उसमे सें बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर को छोडकर बाकी के छहं सदस्यों नें प्रारूप समिती की जिम्मेवारी ले तो लियी पर वे अपने निजी कामों के वजह सें और अपनी सेहत की वजह सें वे संविधान लिखनें के काम पर आ नहीं सके।उनमें सें दौ सदस्य विदेश में जाकर स्थायिक हो गये,दौ सदस्य संस्थानों के कुछ कामों में व्यस्त थे।और दौ सदस्य जो थे उनमें से एक की तबीयत काफी बिघड चुकी थी और दुसरा दिल्ली सें दुर रहता था।तो वे भी नहीं आ सके।तो आखीर में संविधान लिखने का पुरा भार,जिम्मेदारी बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर के उपर पडी।और उन्होनें अपने खराब स्वास्थ्य के बावजुद भी संविधान लिखनें की जिम्मेदारी बखुबी एवंम सफलतापुर्वक निभायी और भारत को एक नया संविधान दिया।

बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर ने क्या कहा था?

बाबासाहब नें संविधान राष्ट्र को देतें वक्त कहा था की,संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यो ना हो,वो अंततः बुरा ही साबीत होगा,अगर उसे इस्तेमाल में लानें वालें लोग बुरे हों।संविधान का भविष्य उसको चलानेवालें हाथ में होता है।

इस राष्ट्र के महान संविधान लिखने में बाबासाहब ने कोई कसर नहीं छोडी थी।और इसलिए संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी कहा था की,इस कुर्सी में बैटकर मै पुरे संविधान सभा कें सदस्यों का अवलोकन करता था।उनमें सें सबसे जादा मेहनत बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकरजी नें कियी।यह राष्ट्र उनका हमेशा कृतज्ञ रहेगांं ऐसें उद्गार देश के पहले राष्ट्रपती और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ.राजेंद्र प्रसादजी ने निकाले थे।

महात्मा गांधी के उद्गार बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर के बारे में।

महात्मा गांधी नें भी संविधान का निर्माण होनें के आंरभ में कहा था की,अगर हम बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर के ज्ञान का,देश के निर्माण में साथ नहीं ले सकते हो तो इसमें नुकसान आम्बेडकर का नहीं बल्कि हमारें देश का है।

पंडित जवाहरलाल नेहरु ने भी कहा था की देश का संविधान जो की बहुतही जटील था उसको डॉ.भीमराव आम्बेडकर के बगैर हम पुरा नहीं कर सकते थे।यह देश उनका महान योगदान हमेशा याद रखेगा।और उन्हें संविधान के पिता के रुप में स्विकार करेगा।

इसलिए बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकर के उपर संविधान सभा कें हर एक सदस्य नें अपने सदिच्छाओं की बरसात कियी।इतना ही नहीं अमरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय नें बाबासाहब डॉ.भीमराव आम्बेडकरजी को भारत का ऐतिहासिक संविधान लिखनें की वजह सें सन.1952 में पी.एच.डी.की डिग्री सन्मानपुर्वक प्रदान कियी।

-भारतीय संविधान की विशेषताए:

1.विशाल एवंम विस्तृत संविधान
2.लिखीत संविधान
3.संसदीय शाशन प्रणाली
4.लचीला एवंम कठोर संविधान
5.संघात्मक के साथ एकात्मक
6.एकल नागरिकता
7.मुल अधिकार
8.नितीनिर्देशक तत्वं
9.मुल कर्तव्य
10.स्वतंत्र न्यायपालिका
11.वयस्क मताधिकार
12.संविधान की सर्वोच्चता
13.ग्राम पंचायतों की स्थापना

भारतीय संविधान विस्तार से:

1.विशाल एवंम विस्तृत संविधान:

भारतीय संविधान में कुल 395 अनुच्छेद,08 अनुसुचीया, 22 भाग थे।इसलिए इसे विश्व का सबसे बडा संविधान कहा जाता है।

-अमेरिका कें संविधान में सिर्फ 7 अनुच्छेद है।
-कनाडा में-147
-आस्ट्रेलिया-128
-आफ्रिका-253

इन सभी देशों के संविधान में सिर्फ इतने ही अनुच्छेद है।और हमारें भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद थे लेकीन अभी उसकी संख्या 400 सें भी जादा हुयी है।इसलिए सर आयवर जेनिंग नें भारतीय संविधान को विश्व का सबसे बडा संविधान कहा है।

2.लिखीत संविधान:

संविधान दौ तरह कें होते है

अ.लिखीत
ब.अलिखित

पर भारतीय संविधान एक लिखीत संविधान है।लिखीत संविधान में सब कुछ लिखीत स्वरूप का होता है।जैसे हमारा भारत का संविधान।और अलिखित संविधान में रुढी,परंपरा,प्रथाओं के उपर आधारित कानुनी नियम होते है जैसे ब्रिटन का संविधान।
3.संसदीय शाशन प्रणाली:

-इसमें भी दौ प्रकार होते है।

अ.अध्यक्षात्मक शाशन प्रणाली
ब.संसदीय शाशन प्रणाली

इस प्रणाली में राष्ट्रपती कार्यपालिका का वास्तविक प्रधान या मुखीया होता है।और उनका जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव किया जाता है।जैसा की अमरिका का संविधान और संसदीय प्रणाली का जो प्रकार है उसे हमारे भारतीय संविधान में अपनाया गया है।जिसमे राष्ट्रपती भारतीय कार्यपालिका का केवल नाममात्र प्रधान कहा जाता है।और वास्तविक प्रधान,प्रधानमंत्री को कहा गया है।

3.कठोर एवं लचीला संविधान:

संशोधन की नजर सें संविधान दौ प्रकार के होते है।

अ.लचीला संविधान (Flexible Constitution)
ब.कठोर संविधान( Rigid Constitution)

-इसे समझनें के लिए हमें संविधान संशोधन की प्रक्रिया को समझना होंगा।

1.साधारण बहुमत
2.विशेष बहुमत
3.विशेष बहुमत + आधे राज्यों का समर्थन।

मतलब अगर कोई विधेयक साधारण बहुमत सें पारीत हो रहा है अपने संसद में तो वो लचीला Flexible संविधान में आता है और दुसरा,अगर कोई विधेयक Bill विशेष बहुमत से पारीत किया जाता है और उसमें आधे से जादा राज्यों की सेहमती लग रहीं है तो वो संविधान कठोर संविधान में आता है।

4.संघात्मक के साथ एकात्मक:

-देखों आपने संविधान का अनुच्छेद-1 (Article-1) पढा होगा।उसमें क्या लिखा है।

"India i.e.Bharat shall be union of Territory"

मतलब भारत देश राज्यों का संघ होगा।इसमें राज्यों को अलग और केंद्र को अलग शक्तीयाँ दी गयी है।दोनों की अलग अलग विशेषताए और अलग अलग विषय दिए गये है और वे सारे विषय संविधान कें तीनों सुचीयों में आते है।

1.केंद्र सुची (Central list)
2.राज्य सुची (State list)
3. समवर्ती सुची (Concurrent list)

इन तीनों सुचीयों में अलग अलग विषय दिए है।जिस पर केंद्र और राज्य मिलकर कानून बनातें है।यहीं हमारे संविधान के संघात्मक लक्षण है।और एकात्मक लक्षण में एकल नागरिकता Single Citizenship होती है।जैसा की केंद्र और राज्यों की एकही नागरिकता हमारे संविधान में अपनायी गयी है।लेकीन अमरिका में Dual Citizenship है।वहाँ केंद्र की अलग और राज्यों की अलग नागरिकता होती है।


5.एकल नागरिकता:

एकल नागरिकता Single Citizenship वो होती है।जैसा की केंद्र और राज्यों की एकही नागरिकता।लेकीन अमरिका में Dual Citizenship है।वहाँ केंद्र की अलग और राज्यों की अलग नागरिकता होती है।जिसे दोहरी नागरिकता भी कहते है।

6.वयस्क मताधिकार:

वयस्क मताधिकार की आयुसीमा हमारे संविधान में 21 वर्षे की थी।बाद में 61 वे संविधान संशोधन 1989 में इसे 21 सेंं घटाकर 18 वर्षे तक कर दी गयी है।

7.संविधान की सर्वोच्चता:

मतलब भारत के संविधान को सभी कानुन का पिता माना जाता है। Father of all laws कहा जाता है।भारत के संविधान को कानुन की जननी कहा जाता है।भारत में संसद सर्वोच्च नहीं बल्कि संविधान सर्वोच्च है और ब्रिटन में संसद सर्वोच्च है।

8.मुल अधिकार:Fundamental Rights:

मुल अधिकार हमनें अमरिका के संविधान सें लिए है।मुल संविधान में कुल 7 अधिकार थे।लेकीन बाद में इसें 44 वें संविधान संशोधन 1978 में जो सातवा अधिकार संपत्ती का अधिकार था उसे हटा दिया गया।अब मुल अधिकार केवल छहँ है।

9.राज्य के नितीनिर्देशक तत्वं: Directive Principles of state policy(DPSP)

यह विशेषतः हमने आयरलैंड के संविधान सें लिये है।यह राज्यों को अपनी नीती बनानें में निर्देश करते है।लेकीन यह राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं है।

10.मुल कर्तव्य:Fundamental Duties:

सरदार स्वर्ण सिंह समिती की शिफारस पर 42 वें संविधान संशोधन 1976  में दस मुल कर्तव्य शामील कर दिए है।उसके बाद 86 वें संविधान संशोधन 2002 में 11 वा कर्तव्य इसमें शामील किया है।

11.स्वतंत्र न्यायपालिका:

मजबुत लोकतंत्र में स्वतंत्र न्यायपालिका का बहुतही महत्त्व है।मतलब हमारी न्यायव्यवस्था किसी भी जाती समुदाय को लेकर भेदभाव नहीं करती है।किसी भी व्यक्ती विशेष को लेकर भेदभाव Partiality नहीं करती है।यह हमारीं स्वतंत्र न्यायपालिका की विशेषतः है।

12.संविधान की सर्वोच्चता: Supermacy of the Constitution.

हमारें देश में संविधान ही सर्वोच्च है।और यह बहुतही महत्वपूर्ण बात है।जहाँ संविधान को संपूर्ण अधिकार होते है वह देश सच में एकात्मकता बनाए रखता है।

13.ग्राम पंचायतों की स्थापना:

यह व्यवस्था भारत में बहोत पुराणे काल सें चलती आ रही है।इसलिए ग्रामीण भारत को ध्यान में रखते हुए हमारे संविधान निर्माताओं ने इसको विशेष रूप सें संविधान में स्थापित किया है।

आज हम ग्रामीण भारत में देखते है की वहा की व्यवस्था भी संविधान के दायरें में रहकर ही चलती है।गाँव से लेकर केंद्र तक कानून की दौर सें हमारा भारत बंधा हुआ है।यहीं हमारें संविधान की विशेषतः है।

तो यह थी हमारे संविधान की कुछ प्राथमिक विशेषताए।
हम सब जाणते है की देश कानून के उपर चलता है।लेकीन हम अपनी रोज की जिंदगी जीतें वक्त यह कानुन किस तरह सें काम करता है यह देखने की कोशीश नहीं करते।


-हम ऐसा क्यो करते है?"

क्यों की हम में अपने संविधान के बारे में उतनी जागरूकता नहीं है।हम जीतना अपने धर्म के किताबों को लेकर Serious है उतना हम अपने राष्ट्रीय किताब संविधान को लेकर नहीं है।इसका भी एक मुख्य कारण है।हम धार्मिक चीजों को जीतना महत्त्व देते है उतना महत्त्व संविधान को नहीं देते है।धार्मिक किताबें, भगवान के उपर श्रद्धा, भक्ती हम इसलिए करते है क्यों की हमारे उपर बचपन से ही ऐसें संस्कार किये जाते है।इसलिए हम धार्मिक बातों को जादा महत्त्व देते है।देना भी चाहीए मै बिलकुल भी इसके खिलाफ नहीं हुँ।क्यों की धार्मिकता हमें मन को शांती देती है।

पर जीस तरह हम धार्मिक किताबें,धार्मिक बातें,विश्वास दिल से करते है ठिक उसी तरह हमें अपने संविधान का भी अपने दिल सें सम्मान करना चाहीए।उसका अध्ययन,उसकें अनुच्छेदों का (Provisions) पालन करेंगे तो सच में भारत देश एक विकसित रुप में दुनियांं के सामने आएगा।


आईए हम प्रतिग्या करते है की आनेवाले संविधान दिन पर एक संकल्प करते है की,हम अपने घर में एक संविधान की किताब Book लायेंगे और लाकर उसको सिर्फ रखेंगे नहीं बल्कि कम सें कम रोज एक अनुच्छेद पढेंगे उसको अच्छें सें समझेंगे और उसके मार्गदर्शक तत्वों पर चलेंगे साथ ही साथ हम अपनें समाज को भी संविधान के बारे में जागरूक बनाकर एक सशक्त भारत बनाएंगे ऐसी शपथ लेते है।यहीं हमारे संविधान को और संविधान निर्माताओं कों अस्सल में मानवंदना, अभिवादन होगा।


-अँड.किरण चावरे मो.9309770054






Comments

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  2. Wow sir great, khup chhan mahiti dilit Dnyanat bhar padli

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