नमस्कार दोस्तो!! मै एक सुशिक्षित बेरोजगार युवा हुँ।मैने बहुत सारी मतलब चार-पाच डिग्रीया विश्वविद्यालयोंसे प्राप्त कियी है।और अभी मै एक अच्छी सरकारी नोकरी की तलाश में हुँ। जैसा की हर बेरोजगार युवा नोकरी की तलाश में रहता है।मै सुबह पाच बजे उठता हुँ।दो घंटे अध्ययन करता हुँ।उसके बाद मै थोडा एक्सरसाईज करने बाहर निकलता हुँ।मै करीब दो घंटे एक्सरसाईज करता हुँ।उसमे दौडना,योगा करना,व्हॉलीबॉल खेलना,कभी कबार तेरना आदी चीजे में हर दिन करता हुँ।उसके बाद में घर आकर पाणी नहाणा,फ्रेश होकर दो-तीन न्युजपेपर पढना।ये सारी बातें दो घंटे में करता हुँ।उसके बाद मै डीरेक्टली ब्रेकफास्ट के बजाय खाना खाता हुँ। ये सारी बाते मै 11:00 बजे तक करता हुँ।
उसके बाद मै अपनी पढाई चालू करता हुँ।और ये पढाई मे अपने स्टडी रुम में करता हुँ।ताकी मुझे कोई डिस्टर्ब ना हो सके।मै ये अध्ययन शाम 7:00 बजे तक करता हुँ।और उसके बाद मैं थोडा फ्रेश होके अपने दोस्तों से मिलता हुँ।उनसे बातें करता हुँ।अपने करिअर के बारें में।अपने भविष्य के बारें में।और कभी कभी हसी-मजाक।कभी घुमने जाना,कभी अगर अच्छी मुव्ही सिनेमाघरों में लगी तो और सभी दोस्तों का मुड हो तो हम देखने भी जाते है। कभी कबार बाहर अलग-अलग होटेल में खाना खाने जाना।ये सब चीजे हम करते है।
लेकीन जादातर हमारे जीवन में पढाई पढाई और सिर्फ पढाई ही है।जो हम कर करके बहुतही बोअर हो चुके है।बहुतही थक चुके है।और इतनी पढाई करने के बावजुद भी नोकरी हमारे पास भटकने का नाम ही नहीं ले रही है। इसी तरह और भी छात्र बहुतही परेशान है।और काफी डिप्रेशन मे अपनी लाईफ जी रहे है।क्यो की एक तो नोकरीयाँं नहीं है।और उपर सें बढती उम्र।शादी करने के लिए कोई लडकीयाँ नहीं देते क्यों की नोकरी नहीं।और उपरसे माँ-बाप,रिश्तेदार ताने मारते रहते है। इसमेंं दोष सिर्फ मेरा या किसीभी युवाओ का नहीं है।हाँ..!
मै मानता हुँ की हम युवाओका भी गलती है।युवाओ को और भी बहुत पर्याय है अपनी जिंदगी जीने के।अपना और अपने परिवार का नाम कमाने के,पैसा कमाने के।जैसा की छोटा-मोटा बिझनेस,व्यवसाय करके अपनी लाईफ सेट करने के।
परंतु, इस बात में उतनी सच्चाई नहीं है।क्यों की,बिजनेस करने के लिए हर किसी के पास पैसा नहीं है।और सबसे
महत्वपुर्ण बात ये है की,हमारे समाज की मानसिकता Mentallity सिर्फ सरकारी नोकरी की है।ये हमारे समाज का एक काला सच है।

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