विचार परिवर्तन और हमारी जिंदगी। विचारों को बदलकर ही हम अपनी जिंदगी बदल सकतें है। विचारों में दुनिया बदलनें की ताकत होती है। इसें पढों, अंमल करो और अपनी जिंदगी बदलो।
दोस्तों आज हम एक ऐसें विषय पर बात करने जा रहे है।जो बहुतही महत्वपुर्ण है।और उसके उपर मै जो सोल्यूशन बताने जा रहा हुँ।वो सोल्यूशन भी इतना पावरफुल है की आप सोच भी नहीं सकते।
अपने विचारो की ताकत।
दोस्तों,अगर मैं आपसे ये पुच्छु अपना नशीब,अपना भाग्य,अपनी किस्मत कोण बदल सकता है?तो बहोत सारे लोगों के जवाब आएँगे की;
अपने विचारो की ताकत।
दोस्तों,अगर मैं आपसे ये पुच्छु अपना नशीब,अपना भाग्य,अपनी किस्मत कोण बदल सकता है?तो बहोत सारे लोगों के जवाब आएँगे की;
१.भगवान
२.हमारें पिछले जन्म के कर्म
२.हमारें पिछले जन्म के कर्म
३.पैसा
४.हमारे माँ-बाप
५.शिक्षा,आदी.
पर मै आपसे फिरसे पुच्छता हुँ की क्या ये जवाब सही है? नहीं बिलकुल भी नहीं।
तो इसका असली जवाब क्या है?इसका असली जवाब है।सिर्फ आप! हाँँ..सिर्फ आप!आप ही अपनी किस्मत बदल सकते है।क्यों की हम स्वंय अपना भाग्य,अपना नशीब लिखते है।अपने कर्मों से और अपने विचारों से।यहीं सुर्यसत्य है।
हाँ..मै मानता हुँ की भगवान का आशिर्वाद हमारे जिदंगी में बहुतही मायने रखता है।भगवान के उपर रखी हुयी श्रद्धा हमें जीवन में आशा की किरण की तरह होती है।उससे हमें बहुतही प्रेरणा और उर्जा प्राप्त होती है।ये बात निसंदेह सत्य है।पर अगर आप अपनी किस्मत बदलना चाहते है तो आपके विचारोसें ही उसे बदला जा सकता है।ये विचारोंंकी ताकत इतनी महत्वपुर्ण है की में इसे शब्दों में नही बता सकता।
दोस्तों हमें ऐसा क्यो लगता है की हमारी जिंदगी कोई और आकर बदलेगा? मतलब भगवान,परमात्मा,कोई विशेष व्यक्ती,अपना जीवनसाथी?
पहले इसका कारण जानते है।
१.हमारे बचपन के संस्कार की वजह सें।
२.हमारे माँ-बाप, बहन-भाई, रिश्तेदार, दोस्तों की वजह सें।
३.हमारा स्कुल, महाविद्यालय, हमारे शिक्षक,रोज पढें जानेवाले न्युजपेपर्स।
४.हमारे आसपास का सामाजिक और धार्मिक वातावरण।
५.और इन सभी स्त्रोतों से बना हुआ हमारा अंदर का दृष्टिकोन आदी।
-ये वो पाँच चिजें (Sources) है जिनसे हमारा दृष्टिकोन,विचार, संस्कार बनते है।
और इन सब चिजों सें हमारे उपर संस्कार तब बनते है जब हम छोटे होते है। या यु कहे तो बचपन में। इसी संस्कारों सें आप बनते है और आप जब बडे भी होते है तो भी ये संस्कार हमारे साथ ही बडे होतें है।और ये संस्कार हमारे अंदर इतने गहरे होते है की बाद में हमारे अंदर इसकी चौकट बनती है।एक साचा बनता है और उसी साचे में या उसी चौकट में रहकर हम अपनी जिंदगी बिताते है और दुनिया को देखते है।
और जब भी हम कोई बात करते है। हम अपने भविष्य के बारे में कोई प्लान बनाते है, या कोई भी नियोजन करते है।या कोई महत्वपुर्ण निर्णय लेते है। या हम अपने करिअर के बारे में सोचते है। या हम चाहे किसी रिश्तो के बारें में सोचते है। या कोई सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक चिजों कें बारें में बोलते है।या किसी पर विश्वास करना हो। या किसी से रिश्ता तोड देना हो। तो ये सब चिजें हम उसी दायरे में रहकर करते है।जो हम अपने बचपन में हुये अपने माँ-बाप,भाई-बहन आदी के संस्कारों सें हमारा विचार करने का दायरा,दृष्टिकोन से बना होता है। चाहे वो गलत हो,या सही हो। पर हम उसी दायरें में रहकर सोचते है और अपने कर्मं करते है। ये हमारी जिंदगी की सच्चाई है।
और जब भी हम कोई बात करते है। हम अपने भविष्य के बारे में कोई प्लान बनाते है, या कोई भी नियोजन करते है।या कोई महत्वपुर्ण निर्णय लेते है। या हम अपने करिअर के बारे में सोचते है। या हम चाहे किसी रिश्तो के बारें में सोचते है। या कोई सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक चिजों कें बारें में बोलते है।या किसी पर विश्वास करना हो। या किसी से रिश्ता तोड देना हो। तो ये सब चिजें हम उसी दायरे में रहकर करते है।जो हम अपने बचपन में हुये अपने माँ-बाप,भाई-बहन आदी के संस्कारों सें हमारा विचार करने का दायरा,दृष्टिकोन से बना होता है। चाहे वो गलत हो,या सही हो। पर हम उसी दायरें में रहकर सोचते है और अपने कर्मं करते है। ये हमारी जिंदगी की सच्चाई है।
अपने विचारों से हमारे अंदर सकारात्मक बदलाव आ रहै है या नकारात्मक ये कैसे पहचाने? दोस्तों, अगर हम किसी चीज के बारे में सोचते है।कोई भी जैसा, हमारा करिअर हो सकता है, हमारें रिश्तें, हमारी भविष्य की कल्पना हो सकती है या फिर हमारी आर्थिक स्थिती के बारे में हम कोई भी नियोजन बना रहे होते है।तो ये सब करते वक्त हम अपने ही बने हुये संस्कार या हमारें दृष्टिकोन सें उसे देखते है और उसे उसी के हिसाब सें करते है ना की उसका असली तरिका क्या है ये जानने की कोशीश भी करते है।उस चिज को हम अपने दायरे में लाकर करने की कोशीश करते है। उसका भी एक अपना दायरा होता है। ये हम सब भुल जाते है। ये हम बहुतही गलत करते है और बाद में उसका सकारात्मक परिणाम हमें दिखायी नहीं देता।
और एक महत्वपुर्ण बात दोस्तों।हम कोई भी काम करते वक्त नकारात्मकता की ओर जादा और जल्दी आकर्षित हो जाते है।तो हमारे मुताबीक उसका रिझल्ट ना मिलना ये स्वाभाविक बन जाता है और उसके बाद हमं पुरा दोष अपने नशीब को देते है। बल्कि हमें ये देखना चाहीए की हमारी गलती कहाँ हो रहीं है?इसका भी कारण हमारा दृष्टिकोन ही है।
हमें अपने मुताबीक रिझल्ट या नतीजा मिलने के लिए क्या करना चाहीए?
१.सबसे पहली और सबसे महत्वपुर्ण बात हमारें उपर थोपे गये विचार को बदलना।
१.सबसे पहली और सबसे महत्वपुर्ण बात हमारें उपर थोपे गये विचार को बदलना।
२.जो चिज जिस रूप में हमारे सामने आती है उसे उसी रूप में स्विकार करना।
३.हमें बोलने के बजाय जादा सुनने की आदत लगा लेना चाहीए।चाहे वो रिश्तोंं में हो या हमारे सार्वजनिक जिंदगी में।
४.हमें हर एक बात को केवल सकारात्मकता सें देखना चाहीए और ऐसा करते हूये पहले उसके वास्तविक रुप को भी देखना चाहीए।
५.हमें लेने के बदले देना चाहीए।इस भावना को हमारे अंदर बढाना चाहीए। प्रकृती का भी यही नियम है और ये नियम हर जगह, हर वक्त, कही भी एक जैसा ही काम करता है।
६.हम मेहनत कम करते है और अपेक्षाए जादा करते है। इस बुरी आदत को हमें बदलना है।
७.हम जितना देते है ठीक उसी हिसाब से, उतनीही हमेंं अपेक्षाए करनी चाहीए। हमें अपनी गलती की जिम्मेवारी खुद लेनी चाहीए। यह बहुतही महत्वपूर्ण नियम है।
८.हमें तुलनात्मक अध्ययन करना चाहीए।जो बहुतही महत्वपुर्ण है। अगर हमं किसी चिज की तुलना करते है तो उस दोनों चिजों मे समानता होनी चाहीए। जैसा हम गधे की तुलना घोडे के साथ नही कर सकतेंं।
९.हमें किसी भी बात को बढा चढा कर नहीं बोलनी चाहीए।
ये थे कुछ विचार परिवर्तन के नियम। ये नियम अगर आपने अपनी जिंदगी में अंमल करते है तो इसके इतने असरदार और तुरंत रिझल्ट देनेवाले फायदे मिल सकते है की ये बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।यही वह जिंदगी बदलने के कुछ नियम है।
-किरण मुंबई.
मो.9309770054
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