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बौद्ध धर्म केवल एक धर्म नहीं,बल्कि एक जिंदगी जीनें का सरल,मध्यम और कल्याणकारी मार्ग है।इस आर्टीकल को पढकर जानिए की कौनसें गुणधर्मों की वजह सें बौद्ध धर्म दुनिया का सबसें महान धर्म बना।

आज हम धार्मिक विषय पर बात करनेवाले है जो की बहुतही महत्वपुर्ण है और हमारेंं जिंदगी के लिए और हमारी आनेवाली पिढी के लिए भी।बौद्ध धर्म को और उसके तत्व को विश्व के बडे बडे वैज्ञानिकोनेंं स्विकार किया है।क्यों की बौद्ध धर्म(धम्म) (Religion) Science के उपर आधारित धर्म है।इस धर्म में कोई भी चमत्कारिक बाते, जादू, टोना,ब्लेक-मैजीक,अंधविश्वास, पाखंडवाद,अवतारवाद,स्वर्ग-नरक की काल्पनिक बातें,पाप-पुण्य,देवताओं को खुश करने के लिए जानवरों की नरबली,पुर्वजन्म,पुनर्जन्म आदी बातें नहीं है। इस धर्म के संस्थापक (Founder)तथागत सिद्धार्थ गौतम बुद्ध ने सिर्फ Science के उपर आधारित Based शिक्षा Knowledge दियी है।

आईए हम जानते है की बौद्ध धर्म आज भी कितना सुंसगत और प्रासंगिक है।पहले हम इस महान बौद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के बारे में  संक्षिप्त में जानते है।

सिद्धार्थ गौतम बुद्ध:(जन्म 563 B.C.- 483)

बौद्धधर्म के संस्थापक सिद्धार्थ गौतम बुद्ध का पुरा नाम सिद्धार्थ शुद्धोधन शाक्य था।और उनके माता का नाम महामाया था।उनके पिता शुद्धोधन एक दिग्विजयी राजा थे।और उनकी माता महामाया एक महाराणी थी।वे जिस नगर में रहते थे उस नगरी का नाम कपीलवस्तु नगरी था।सिद्धार्थ बुद्ध के जन्म के बाद कुछ ही दिनों में महाराणी महामायांं का देहांत हो गया।और उसके बाद राजा शुद्धोधन नें सिद्धार्थ बुद्ध की मौसी महाप्रजापती गौतमी से दुसरी शादी की।उसके बाद सिद्धार्थ बुद्ध का पालन-पोषण उनकी मौसी महाप्रजापती गौतमी नेंं ही किया।

सिद्धार्थ गौतम एक राजकुमार थे।उनके यहाँ धन,दौलत,ऐश्वर्य,ऐशों आराम के साधनों की कोई कमी नहीं थी।कहा जाता है की उनके खेत में हजारो नोकर-चाकर काम करते थे।राजा शुद्धोधन ने अपने पुत्र सिद्धार्थ के लिए तीन अलग-अलग राजगृह का निर्माण किया था।जो तीनों अलग-अलग ऋतू में रहनेंं के लिए पोषक होंं।इतने ऐशों आराम की जिंदगी थी सिद्धार्थ गौतम बुद्ध की।

लेकीन सिद्धार्थ गौतम अपने बचपन सें ही हर बात पर एक जादा सोचनेवाले थे।वे हर बात पर काफी गौर से और काफी गहराईं से सोचते थे।उनको पैसा, धन,दौलत, ऐशों आराम का बिलकुल भी आकर्षण नहीं था।एक दिन सिद्धार्थ बुद्ध के जीवन में एक ऐसां मोड आया की उनकी पुरी जिंदगी को एक नयी दिशा मिली।


सिद्धार्थ गौतम का गृहत्याग:

दोस्तों, ये एक बहुतही विवादास्पद मुद्दा है।क्यों की बहोत सारे विद्वान लोगों का कहना है की बुद्ध ने अपना सांसरीक जीवन को त्याग देने का कारण यह बताते है की बुद्ध जब अपने रथ पर बैठकर बाहर निकले थे।तो उन्होंने तीन ऐसें दृश्य देखे। जीससे बुद्ध ने गृहत्याग किया।आईए वे दृश्य क्या थे।ये जानते है।

1.एक बुढा आदमी
2.एक मरीज
3.इन्सानी शव,प्रेत: (एक मरा हुआ आदमी)

ये वह तीन दृश्य थे।जिसे देखकर सिद्धार्थ नें घर छोड दिया या गृहत्याग किया। ताकी ये पत्ता लगाने के लिए की इन्सान की ऐसींं अवस्था क्यों होती है।

लेकीन दोस्तों, यह कारण बिलकुल भी सत्य नहीं है।और इस कारण को हम अपने सदसद्विवेकबुद्धी सें देखे तो यह हमारे बुद्धी को बिलकुल भी स्विकार्य नहीं है।क्यों की सिद्धार्थ बुद्ध ने जब गृहत्याग किया था तब उनकी उम्र करीब 29 साल की थी।और 29 साल की उम्र तक सिध्दार्थ बुद्ध ने अपने घर में एक मरीज,एक बुढा आदमी या एक मरा हुआँ आदमी कैसें नहीं देखा होगा? ये बहुतही सोचनेवाली बात है।उनके खुदके माता-पित्ता की उम्र भी बहोत जादा थी।और वे बुढापें की ओर ही जा रहे थे।क्यों की सिद्धार्थ बुद्ध की उम्र 29 साल थी तो उनके माता-पिता और उनके दादा-दादी भी बुढे थे।और भी राजगृह में,उनके खेतों में काम करनेवाले मजदूर थे।
उनमें कैसे क्या एक बुढा आदमी,एक मरीज,और एक मरा हुआ आदमी कैसें नहीं हो सकता।बिलकुल हो सकता है।और बुद्ध नें ये तीनों दृश्य अवश्य देखेंं होंगे।

दोस्तों सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के गृहत्याग का असली कारण ये तीनों दृश्य नहीं थे बल्कि उनके गृहत्याग का असली कारण था रोहीणी नदी के पाणी की वजहं से दों अलग अलग वर्गों यानी की शाक्य और कोलीय इस दो वर्ग में एक बहोत बडा वाद।यह कारण हमें हमारें संविधान निर्माता बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकरजी ने अपनी किताब (The Buddha and his Dhamma) में बताया है।जो की उन्होनें खुद बौद्ध धर्म के उपर काफी गहराई सें अध्ययन करके उस धर्म को अपनाकर यह कारण बताया है।


बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर नेंं यह कारण हमें बताया सिद्धार्थ बुद्ध के गृहत्याग का।इसलिए यह कारण हमें सच मानना ही चाहीए ऐसां नहीं है। पर जो कारण हमें बताया गया की बुद्ध ने वो तीन दृश्य देखें जिससें बुद्ध के मन पर काफी बडा परिणाम हुआ।यह कारण हमें बहुतही तर्कहीन और अस्विकार्य लगता है। is a common sense.

इसलिए हमारें संविधान निर्माता बाबासाहब डॉ.भीमराव आंबेडकर ने बताया हुआ कारण बहुतही सुसंगत और प्रासंगिक लगता है।और अब बहोत सारे बौध्द राष्ट्रों में भी यही कारण स्विकार किया जा रहा है।

तो यह था सिद्धार्थ बुद्ध का संक्षिप्त में परिचय।

अब हम तथागत गौतम बुद्ध की दियी हुयी शिक्षा और उनके महान तत्वों के बारे में समझेंगे।

आखिर क्या वजह रही होगी की भारत में पैदा होनेवाला बौद्ध धर्म पुरे विश्व में कैसे फैल गया?

आईए दोस्तों,आखिर क्या कारण था की ये धर्म अपने भारत में पैदा होनेवाला धर्म विश्व का एक (Major) धर्म बन गया।दुनिया को बुद्ध की कौनसी शिक्षा प्रभावित कर गयी?क्यों दुनिया को बौद्ध धर्म का आकर्षण है?आज बौद्ध धर्म को पुरे 2560 से भी जादा वर्षे हो चुके है।फिर भी दुनिया को इस धर्म का इतना आकर्षण क्यो है।क्यों यहीं धर्म लोगोकों प्रासंगिक लग रहा है इस बात पर हम एक नजर डालेंगे।आईए देखतें है की क्या वजहं है।

इसका असली कारण है की यह धर्म हमें एक मध्यम मार्ग सिखातां है।और इस धर्म का आधार विज्ञान है। इस धर्म में पाखंडवाद और अंधविश्वास को बिलकुल भी जगह नहीं है।यह इसका प्रमुख कारण है।और यह अब अध्ययन का विषय बन चुका है।दुनिया के बडे-बडे विश्वविध्यालयों में लाखों छात्रं  इसपर पी.एच.डी की डिग्रीयाँ प्राप्त कर रहे है।यह बहोत सालों सें संशोधन का विषय बन चुका है।आईए हम इसका पहला कारण जानते है।

1.बुद्ध का व्यक्तीत्व:
2.विज्ञानवाद:
3.तर्कशुद्ध शिक्षा:
4.मध्यम मार्ग:
5.अच्छे कर्मों के उपर जादा जोर:
6.वर्तमान में जीना:
7.धर्म में खुद का अस्तित्व मनुष्य के समान:
8.स्वर्ग-नरक और देवी-देवताओं के बुद्धीहीन संकल्पनाओं का भय नहीं:
9.पुनर्जन्म और पुर्वजन्म का भय नहीं:
10.समता,स्वतंत्रता, भाईचारा, समान न्याय,लोकतंत्र,समानता की सिखं।

यह कुच्छ प्रमुख बातें थी जिससे बौद्ध धर्म पुरे दुनिया में फैल चुका है।और जीस देशों नें बौद्ध धर्म को अपनाया है वे सभी देश विकसित राष्ट्र के रुप में खडे है।जैसे जपान,चीन,थाईलंड आदी। तो आईए हम इस 10 वजह को विस्तारित रुप सें जानते है।


1.बुद्ध का व्यक्तीत्व:

बुद्ध का व्यक्तीत्व एक बहुतही सुंदर और आकर्षक व्यक्तीत्व था।उनका लंबा-चौडा कद,शैर जैसी चाल,सुमधुर संगीत जैसी आवाज,उनका चौडा सिना,उनके लंबे कान,उनके तेजस्वी दांत,उनकी उंचाँँई यह उनके व्यक्तीत्व के कुछ अंग थे।जिसे लोग देखकर बहुतही प्रभावित होते थे।उनमें महापुरुष के बत्तीस विशेषताए थी।

2.विज्ञानवाद:

बौद्ध धर्म एक Science के उपर आधारित धर्म है।यह एक बहुतही तेजी सें फेलनेवाला धर्म है और यही वह कारण है की इसका आधार Science है।अल्बर्ट आईन्स्टाईन, स्टीव्ह जॉब्स,न्युटन आदी।वैज्ञानिकोनें बौद्ध धर्म के कई सारे थेअरी के उपर संशोधन किये थे।अल्बर्ट आईन्सटाईन का सापेक्षतावाद का सिद्धांत तथागत गौतम बुद्ध के प्रतित्यसमुत्पाद यानी की कार्यकारणभाव की थेअरी के उपर आधारित है।और इसका पुरा श्रेय अल्बर्ट आईन्सटाईन नें बुद्ध के सिद्धांत को दिया है।और अल्बर्ट आईन्सटाईन ने बौद्ध धर्म के बारे में कहा था की,''धर्म का युग अब समाप्त होनेवाला है अगर पृथ्वीपर जादा देर तक अपना अस्तित्व बनानेवाला कोई धर्म है तो वो सिर्फ बौद्ध धर्म है।क्यों की बौद्ध धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो पुरा Science के उपर आधारित धर्म है''

बुद्ध ने अपने पुरे जीवन मे हजारों प्रवचन दिए थे पर किसी भी प्रवचन में बुद्ध ने अंधविश्वास,पाखंडवाद, स्वर्ग-नर्क,जादू-टोना,चमत्कार, अवतार ऐसी बातों का समर्थन नहीं किया।बल्कि बुद्ध नें ऐसी बातों का बहुतही कडा विरोध किया।

3.तर्कशुद्ध शिक्षाप्रणाली और विचारों की स्वतंत्रता:

बुद्ध ने अपने पुरे प्रवचनों में अपने अनुयायीयों कोंं विचारों की और तर्क करने की पुरी तरह स्वतंत्रता दे चुकी थी।बुध्द स्वंय खुद कहते थे की मेरी बतायी हुयी बात को तुम ऐसें ही मत स्विकार करो।या किसी महान धार्मिक किताबों में बतायी गयी बातेंं हो या किसी महान धर्म पंडितने बतायी हुयी बाते तुम ऐसेही बगैर सोचे समझे स्विकार मत करो।पहले उस बतायी गयी बातों पर गौर करों।उस बात के दोनों पहलू को समझों।वह बात Science के तत्वों पर टिकती है या नहीं ये देखो।और वह बात आज वर्तमान में प्रासंगिक है या नहीं ये भी देखो।अगर इन सारे तत्वों के आधार पर यह मेरी बतायी बात या अन्य किसी किताबों मेंं बतायी हुयी बात या अन्य किसी महान आदमी नें बतायी हुयी बात इस आधार पर साबीत होती है।तो ही उस बात का स्विकार करो अथवा फेक दो।चाहे वह मेरी बात हों या अन्य किसी की हो।

ऐसी स्वतंत्रता बुद्ध नें अपने अनुयायीयों को दियी थी।ऐसी स्वतंत्रता किसी ने भी अपने अनुयायीयों को नहीं दियी थी।यहीं बौद्ध धर्म की विशेषतः है।इसके दुनियाभर फैलने की वजह है।अन्य धर्मोपदेशकोंनें इस तरह की स्वतंत्रता नहीं दियी है।और उपर सें कहा की मेरे बताएँ रास्तेपर ही तुम्हैं चलना होगा।में ही आपका कर्तां-धर्तां हुँ।पर बौद्ध धर्म में हमें विचारोंकी पुर्ण स्वतंत्रता दियी है।
(Absolute freedom).

4.मध्यम मार्ग

यह बौध्द धर्म का आधारस्तंभ (Backbone) है।बौद्ध धर्म में जितनी भी शिक्षाएँ बतायी गयी है।जितने भी तत्वं बताए गये है उसका मार्ग मध्यम है।जिसका फल हमें अंत में अच्छा ही मिलेगा।जैसे,अगर हम कोई वीना बजातें है तो उस वीना की जो तार होती है जिससेंं हमें सुमधुर ध्वनी सुनने को मिलती है उस तार को विशिष्ट लेवल तक ही खिंचके बंधाँ होता है।अगर उस तार को हम जादा खिंचतें है तो उसके टूटनें की संभावना होती है।और अगर हम उस तार को पुरी तरह सें ढिला छोड देते है तो उससे बिलकुल भी ध्वनी नहीं आएगी।

उससे ध्वनी इसलिए आती है की वह तार एक मध्यम लेवल पर,विशिष्ट लेवल (Frequency) की ओर खिंची हुयी रहती है।यहीं इसका प्रमुख कारण है उससे मनमोहक ध्वनी आने का।

इसी तरह हमारी जिंदगी भी हमें हमेशां मध्यम मार्ग पर जीना चाहीए।ताकी उससे हमारी जिंदगी में सिर्फ खुशीयाँ ही आए।इसका मतलब हमें किसी चीज के बारें में या किसी व्यक्तीयों के बारें में हमेशा मध्यम मार्ग सें ही देखना चाहीए।अगर हम किसी व्यक्ती के बारें में या वस्तूओं के बारें में जादा लगाव,जादा प्रेम लगाते है तो वो व्यक्ती या कोई वस्तू अंत:में हमें दु:ख ही देनेवाले है।यहीं मध्यम मार्ग है।

5.अच्छे कर्मों के उपर जादा जोर:

बौद्ध धर्म में इन्सान के मरने के बाद उसके शरीर का क्या होगा?उसकी आत्मा का क्या होगा इस तरह की बात को बिलकुल भी महत्त्व नहीं दिया गया है।बल्कि बौद्ध धर्म में ऐसा बताया गया है की इसी जन्म में हमें अच्छे कर्म करना चाहीए ताकी उसका फल हमें इसी जन्म में मिले।अगर हम जमीन आम के फल का बीज बों देते है तो बडा होकर वो पेड आम का ही मिठा फल हमें देता है।इसी तरह से हम अपनी जिंदगी में अच्छे कर्म करते है तो हमें उस अच्छे कर्मं के अच्छे ही परिणाम मिलेंगे।


6.वर्तमान मेंं जिदंगी जीना:


बौद्ध धर्म हमें वर्तमान में जिंदगी जीने की सिख देता है।हमें अपनी जिंदगी जीते वक्त ना ही अपने भुतकाल की बातों में उलझकर रहना है।और ना ही हमें अपने भविष्य की जादा चिंता करनी चाहीए।ताकी हमारा आज का वर्तमान बिघड ना सकें।पर बुद्ध ने ये बात बताते हुए ये कहा की हमें अपने भुतकाल सें जरूर कुछ सबक लेना चाहीए।और भविष्य में आनेवाले कुछ अच्छे-बुरे चुनौतीया का खयाल रखना चाहीए।और इसके लिए हमें नियोजन भी करना चाहीए।ताकी हम अपना वर्तमान अच्छी तरिकेसे जी चुकेंं।

7.बौद्ध धर्म में बुद्ध ने अपना स्थान एक आम इन्सान का रखा है:

बौद्ध धर्म में सिद्धार्थ गौतम बुद्ध नेंं अपना स्वंय का स्थान बिलकुल भी विशेष नहीं रखा है।वे हमेशा कहते थे।में आपकी तरह ही एक साधारण मनुष्य हूँ।मेरा जन्म भी आपके जन्म की तरह ही हुआ है।और मेरी मृत्यू भी आप के मृत्यू की तरह ही होगी।मै ईश्वर नहीं, भगवान नहीं मै कोई प्रेषीत नहीं।मै एक मनुष्य हुँ।

ऐसी उदारतापुर्वक शिक्षा हमें दुसरें धर्म में दिखायी नहीं देती है।बल्कि अन्य धर्म में इसके विपरीत दिखायी देता है।अन्य धर्मोपदेशकों ने अपने अपने धर्म में अपना खुद का स्थान अलग रखा है।हर कोई कहता है मै ही देवदुत हूँ।मै हींं इश्वर हुँ।आप सिर्फ मुझेंं हीं अपना भाग्यशाली और उद्धारकर्ता मानलो।तो ही आपका भला हो सकता है।इस तरह का अपना अलग स्थान गौतम बुद्ध नें नहीं रखा है।और अपनी शिक्षां और तत्वों के बारे में भी पुरी स्वतंत्रता दियी है।

8.स्वर्ग-नर्क के और देवी देवताओं के बुद्धिहीन संकल्पना का भय नहीं:

बौद्ध धर्म में काल्पनिक बातों को बिलकुल भी स्थान नहीं है।जैसे स्वर्ग-नर्क, देवी-देवताओं का बिलकुल भी भय नहीं है।हम आज जगहं- जगहं देखतेंं है की स्वर्ग-नर्क का भय दिखाकें लोगोंं की किस तरह लुट कियी जाती है।ये लुट उनकी होती है जिनका इस अंधविश्वासी बातों पर विश्वास होता है।इसमें गलती लुट होनेवाले निष्पाप लोगों की नहीं होती।क्यों की उनके उपर बचपन सें ही इस तरह के संस्कार जाने-अनजाने में हो जाते है।

पर बौद्ध धर्म हमें इस अंधविश्वासी बातों की खोज करने की पुरी स्वतंत्रता देता है।और इस भय सें हमें बाहर निकालता है।यही बौद्ध धर्म की विशेषतः है।


9.पुर्वजन्म और पुनर्जन्म का भय नहीं:

बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म और पुर्वजन्म का बिलकुल भी भय नहीं है।बौद्ध धर्म हमें भयमुक्त जिंदगी जीने की स्वतंत्रता देता है।बुद्ध कहते है,की अगर आप अपनी जिंदगी में अच्छे कर्मं करते है तो आपको भयमुक्त जिंदगी जीनें सें कोई रोख नहीं सकता।

ये पुर्वजन्म और पुनर्जन्म एक काल्पनीक है।इसे आज तक किसीने भी Science के आधार पर साबीत (Prove) नहीं किया है।

10.समता,स्वतंत्रता, भाईचारा, समान न्याय,लोकतंत्र,समानता की सिखं देता है:

बौद्ध धर्म (धम्म) (Religion) हमें समता, स्वतंत्रता,भाईचारा, समान न्याय, लोकतंत्र और समानता बनाए रखने की सीख देता है।

बौद्ध धर्म में कोई उच्च-निच्चता के शिक्षा को स्थान नहीं है।बौद्ध धर्म पुर्णत: समता के उपर आधारीत धर्म है।इस धर्म में असमानता के तत्वों का प्रावधान नहीं है।बौद्ध धर्म एक विशाल सागर की तरह है।एक इंसान दुसरे इंसान से सिर्फ समानता का व्यवहार करे ऐसी उदारतापुर्वक शिक्षा दी गयी है।इस बौद्ध धर्म के तत्वों का प्रभाव हमारे देश के संविधान के उपर भी पडा है।इसलिए हमारा संविधान एक परिपूर्ण दस्तावेज है।जो आज तक हमारें देश को एक ही समानता के धागें से जोड रखा है।


क्या कभी आपने सोचा है की हमारे भारत देश में इतनी सारी जातीयाँ,अलग अलग धर्म, पंथ होते हुये भी हम सब एक क्यों है?इतनी एकता हम भारतीयों में कैसी है।इस व्यवस्था को बनाए रखने में आखीर कौनसा घटक महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबीत हो चुका है तो इसका जवाब है हमारे भारतीय संविधान में जो मुलभूत तत्व है समता, स्वतंत्रता,बंधुता, न्याय आदी तत्वों की वजह सें हम सब भारतीय एकता के रुप में विश्व के सामने खडे है।जो तत्व हमें भारत में ही जन्में बौद्ध धर्म
(धम्म) नें दिए है।और इसी तत्वों को लेकर बौद्ध धर्म पुरी दुनिया में फैल रहा है।ये हम सब भारतीयों के लिए बहुतही गर्वं की बात है।

एड.के.टी.चावरे, उच्च न्यायालय,मुंबई.
मो.9309770054



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