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बोलनें की कला सीखें और पुरी दुनिया पर राज करें।पब्लिक स्पीकींग हो या अन्य कोई भी कम्युनिकेशन,पब्लिक लाइफ हो या निजी लाइफ,दुनिया का कोई भी क्षेत्र हो बोलनें की कला ही आपकों सर्वोचता हासील कर दे सकती है।

दोस्तों, जैसा की आप जानते है की हम दुनिया में देखतें है की,कोई इन्सान गरीब होता है तो कोई बहुतही अमीर होता है।किसी को जल्दी सक्सेस मिलती है।किसी कों बहूत वक्त लगता है या मिल हीं नहीं पाता है।और कोई बिझनेस में या छोटे मोटे धंदे में भी हम अक्सर देखते है की किसी का धंदा बहुतही तेजीसें बढता है,तो दुसरे का कितना भी प्रयास करें तो भी बढता नही है।

आखीर ऐसा क्यों?

क्या हमारे पास बुद्धी नहीं है?

क्या हम मेहनत नहीं करते है?

क्या हम पैसों की वजह सें पिच्छे रहतें है?

क्या हमारें पास भविष्य की दुरदृष्टी नहीं होती है?

क्या हमारे पास उतना वक्त नहीं होता जितना एक सक्सेसफूल इन्सान के पास होता है?

क्या हमारें पास उनके जैसी आगे बढनें की तीव्र इच्छा नहीं होती है?

इतने सवाल आपके मन में आते होंगे।पर क्या हमनें इनमें से कोई बात या कोई स्कील Skill या हुन्नर छोड दियी है?

ह...ह..ह...ह..

हाँ..एक Skill हमनें छोड दियी है।और वो है हमारी बोलनें की कला।

दोस्तों अगर ये आपके पास है तो आप दुनिया जीत सकते है।सिर्फ बोलने से।दोस्तों यह कला इतनी जबरदस्त है की मै इसे शब्दों में नहीं बता सकता.


बोलने की कला को लेकर हमारे पुर्वज क्या कहते है?

दोस्तों इस कला को लेकर पहले से ही लोगों में सजगता है।हमारे पुर्वज भी कहते थे की जुबान पर शकर और दीमाग में बर्फ लेकर जिंदगी जीयों।कभी भी तुम हार नहीं सकते दुनिया जीत सकते हो।एक अजातशत्रू व्यक्तीत्व निर्माण कर सकते हो।

क्या यह सच है की बोलनें से हम अपनी जिंदगी बदल सकते है ?

हा यह सौ प्रतीशत सच है।आईए हम कुछ उदाहरण और सबुत के तौर पर जानते है।

दोस्तों जैसा की हम सब जानते है की आजकल अपनी जिंदगी जीना कितना मुश्कील हो गया है।हमारे जिंदगी में सिर्फ संघर्ष Struggle दिख रहा है।हम यह संघर्ष क्यों कर रहे है। ताकी हम अच्छी जिंदगी जी सके।और यह जींदगी जीनें के लिए हम नौकरी के प्रयास करते है।कोई बिझनेस, धंदे का प्रयास करता है।

लेकीन यह सब करते वक्त हम में से हर किसी को सफलता मिलती है?नहीं हम में सें कुछ चंद लोगों को ही सफलता मिलती है।और बहुत सारे लोग असफल हो जाते है।इसका मुख्य कारण है हमारी बोलने की कला और उसकी कमी।यहीं मुख्य वजह है।आईए हम इसको उदाहरण के तौर पर समझतें है।और साथ ही साथ हर क्षेत्र में इसका महत्त्व है ये जानते है।


१.राजनीती

दोस्तों आप जानते ही होंगे की आज की राजनीती सिर्फ बोलने के दमपर ही लोग कर रहे है।आज काम कम और बोलना जादा,समाजकार्य कम बोलना जादा।इस तरह की राजनीती आज की है।इसे कोई भी पक्ष,दल Exceptional नहीं है।लेकीन यह कला भी सीखनें में उतनी आसान नहीं है।इस कला को विकसित करने के लिए लोगों से बातें करनी पडती,लोगों में समाज में जाकर काम करना पडता।तब जाकर ये कला विकसित होती है।

राजनीती एक लोकाभिमुख क्षेत्र है।यह लोगों सें Concerned क्षेत्र है। इसमें काम करते वक्त हमें अलग अलग तरह के लोग मिलते है।उनका बोलने का अंदाज पत्ता चलता है।अलग अलग भाषाओं का सुनने को,बात करनें को मिलता है।सामान्य, गरीब,अमीर हर तरह के लोगों से मुलाकात होती है।इससे हमारा भी व्यक्तीत्व विकसित होता है और उभरता है।इसलिए हमारी बोलनें की कला सें हम राजनीती में अपना अच्छा नाम कमा सकते है।

आज राजनीती में शिक्षा, Education का कम महत्त्व दिखायी दे रहा है पर बोलना की कला,दिखावट जादा दिख रहा है।कुछ लोगों की पढाई कम होते हुए भी राजनीती में अपना अच्छा जम बसाते है,अच्छा नाम कमाते है।इसका मुख्य कारण सिर्फ बोलने की कला है।आजकल लोग भी दिखावे सें जादा प्रभावित हो रहे है।


२.बिझनेस, कारोभार,धंदा

दोस्तों आज हम अपना बिझनेस सच में बढाना चाहते है तो बोलने की कला के बगैर हम अपना बिझनेस बिलकुल भी बढा नहीं सकते।बोलने की कला के बगैर हमारी अपने बिझनेस में सफलता  Impossible है।अगर हमें कोई छोटीसी भी चीज बेचनी है तो हमें बहुत कुछ बोलना चाहीए।चाहे वह चीज कितनी भी अच्छी क्यों ना हो।कितनी भी Branded क्यों न हो।पर बोलने के बगैर हम उसें बेच नहीं सकते।

अ.वकील, डॉक्टर आदी

दोस्तों ये उस तरह के बिझनेस है जिसमें सिर्फ बोलकर ही अपना करिअर बना सकते है।उसके बगैर यह संभव नहीं है।हम अगर किसी कानुनी केस को लेकर किसी वकील के पास जाते है।तो उस वकील के पास जाने का हमारा एक ही निकष है की वह वकील जिसके पास हम जाना चाहते है कोई भी कानुनी काम लेकर या कानुनी सलाह लेने के लिए तो हम पहले वह वकील बात कैसें करता है यही हमारा पहला निकष होता है।

हम पहले यह देखते है की वह वकील हमें समाधान पुर्वक बात करता है या नहीं।हमारा अधा समाधान सिर्फ वकील के बोलनें से ही होता है।वकील लोग सिर्फ अपनी बोलने की कला सें ही अपने पक्षकार को अपनी ओर खींचते है।और ऐसें वकील अपने वकालत के पेशें में नाम भी कमा लेते है।और अपने पक्षकार को भी न्याय दिलाते है।

इसका मतलब यह नहीं की पढाई कम या अध्ययन कम भी रहा हो तो भी इस क्षेत्र में अपना नाम कर सकते है।ऐसा नहीं पढाई के साथ साथ वकीलों को बोलने की कला भी सीखनी पडती है।कुछ  ऐसें भी वकील है जीनका अपने क्षेत्र का बहुतही knowledge होता है पर बोलने की कला और उसके कमी की वजह से कुछ वकील पिछे रहते है।


बोलनें की कला एक ऐसी कला है जीससे हम अपने करीअर की उँचाई तक पोहचते है।हमारे देश में सिर्फ बोलने की कला से बडे बडे वकील अपना नाम कमाकर गये है।जैसा की दिवंगत सन्माननीय रामजेठमलानी जी,दिवंगत अरूण जेटलीजी,सन्माननीय उज्वल निकमजी,फली नरीमनजी,हरीश साळवे जी।यह वे सब वकील है जिनका नाम आज भी हमारी न्यायपालिका में बहुतही सन्मानपूर्वक लिया जाता है।इनके पास अपनी विद्वत्ता के साथ साथ बोलने का भी हुन्नर कमाल का था।

ब.डॉक्टर

जैसा की हम सब जानते है की,हम कभी बिमार पडते है तो हम अच्छें से अच्छा डॉक्टर देखते है जो अपनी मेडिकल के डिग्रीयों के साथ साथ अपने पेशंट का भी बोलकर समाधान कर सके।

कई बार शोध में पाया गया है की,मरीज दवाओं सें नहीं बल्कि डॉक्टर के सकारात्मक Positive बोलनें से होते है।बोलनें से ही मरीज ठीक हो जाता है।सकारात्मक सोच ही हमारे अंदर अच्छा बदलाव ला सकता है। मरीज ठीक होने के लिए जीतनी जरूरत दवाओं की होती है उतनी ही जरूरत डॉक्टर के बोलनें का तरीका कैसा है इसकी भी जरुरत होती है।

जपान देश का एक डॉक्टर था।उनका तरीका पुरी दुनिया में बहोतही फेमस है।उनके अस्पताल में आनेवाले लोगों वो इस तरह बोलता था और कुछ इस तरह सुनवाता था की मरीज सिर्फ वे डॉक्टर की कही गयी बातों से ही ठीक हो जाते थे।जैसा की,इस अस्पताल में आनेवाले मरीज की आजतक कभी भी मृत्यू नहीं हुयी।

इस तरह सें मरीज में वो डॉक्टर सकारात्मक बदलाव लाता था।और जब मरीज के उपर कुछ Experiment करने का टाईम आता था तब वह चालु करने सें पहले मरीज को बातें करता था।और इसका नतीजा और डॉक्टरों के मुकाबलें जादा असरदार रहता था।तो बोलने की कला सें ही हम किसी भी क्षेत्र में अपना प्रभाव निर्माण कर सकते है।और यही तत्व हर क्षेत्र में लागु होता है।


बोलने की कला और उसके स्त्रोत:

१.किताबे
२.वर्तमान पत्र Newspaper
३.टि.व्ही.चेनेल
४.महान लोगों की जीवनी Autobiography.
५.राजनीती, समाजनीती,धार्मिक कार्य।
६.,स्कुल,महाविद्यालय,विश्वविध्यालय।
७.ऐतिहासिक किताबें।

दोस्तों यह वह स्त्रोत है जीनसें आप अच्छा ग्यान प्राप्त कर सकते है।अगर हमारे दिमाग में कुछ Knowledge है तो ही हम अच्छा बोल सकते है।अगर हम कुछ पड नहीं रहे है।ऐसेंही बात करने जा रहे है तो आप किसी कों प्रभावित नहीं कर सकते।किताबें हमें सही दिशा देते है।आज हम अक्सर देखते है की जो मोटीवेशनल स्पीकर होते है वे सिर्फ अपने Knowledge के दमपर ही बोलते है और लोगों का दिल जीत लेते है।


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