दोस्तों, जैसा की आप जानते है की अगले महिने 25 दिसंबर को दुनिया का सबसे बडा इसाई भाईयों का त्यौहार आ रहा है और वो है क्रिसमस दिन।दोस्तों क्रिसमस धर्म दुनिया का सबसे जादा आबादीवाला धर्म है।इस धर्म कें अनुयायी पुरे दुनिया में रहते है।उन सबके लिए और हम सब के लिए यह त्यौहार दिसंबर में आ रहा है।यह त्यौहार दुनिया के साथ साथ हमारे भारत देश में भी बहोत बडे पैमाने पर मनाते है।चाहे वह कौनसे भी धर्म का अनुयायी हो पर यह त्यौहार मनाता है।क्यों की हर किसी को यह धर्म अपना लगता है।आईए आज हम जानतें है की इस त्यौहार से जुडी कुछ बातें और प्रभू इसा मसीहा की कुछ ऐतिहासिक बातें।
संक्षिप्त परिचय:
यह त्यौहार 25 दिसंबर को दुनियाभर मनाते है और इसकी तैयारी में इसाई बांधव आठ दिन पहलें ही लग जातें।क्या आपको पता है की यह त्यौहार इसाई बांधव क्यों मनाते है।हमारें इसाई भाई इसे प्रभू यीशु मसीह के जन्मदिन के तौर पर मनाते है।क्यों की प्रभु यीशु मसीह का जन्म इसी शुभदिन हुआ था।ख्रिसमस की पुर्वसंध्या 24 दिसंबर को ही इसका जश्न शुरू होता है।युरोपीय और पश्चिमीं देशों में इस त्यौहार को बहुतही रंगारंग प्रोग्राम आयोजित किये जाते है।भारत में गोवा राज्य में यह त्यौहार बहुतही बडे पैमाने पर मनाते है।और विभीन्न शहरों में भी सभी धर्म कें अनुयायी भी इसमें शामील होते है।क्रिसमस की पुर्वसंध्या पर लोग एकत्रित होकर प्रभु यीशु का ध्यान करते है और उनके स्मरण में कैरोल गीत गाते है।और इस शुभ दीन अपने भाई-बंधूओं में भाईचारा बनाएँ रखनें की पुरी कोशीश करते है।यह बहुतही मानवतावादी धर्म है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की क्रिसमस डे पर दुसरे धर्म के लोग भी आकर शामील होतें है यह इसकी खासियत है।यह चित्र हमें बाकी धर्म कें बारें में इतनें बडे पैमाने पर दिखायी नहीं देता है।
यह त्यौहार इसाई बंधुओं के लिए उतना ही महत्वपुर्ण है जितना हम हिंदु भाईयों के लिए दिवाली और दशहरा है।
आखीर क्या कारण है की यह धर्म दुनिया में इतना फैल चुका है?
मेरे खयाल सें इस धर्म कें फैलनें की वजह है प्रभू यीशु मसीहा की मानवतावादी सीखं।वे उच्च निच्चता और भेदभाव के खिलाफ थे।उन्होनें कभी भी ऐसी अमानवीय प्रथा का समर्थन नहीं किया।उनका दिल एक विशाल समुद्र की तरहं था।
इस त्यौहार को क्रिसमस ट्री सजाने का विशेष महत्त्व:
हा..इस त्यौहार में क्रिसमस ट्री सजानें का बहुतही महत्त्व है।इस दिन परिवार के सभी लोग आकर इस क्रिसमस ट्री के चारों ओर खडे होकर प्रभु यीशु मसीह का स्तुतीगान करते है और साथ में प्रार्थना भी करते है और एक दुसरें को बधाईयाँ भी देते है।इस शुभ अवसर पर इसाई भाई अपने घरों की सजावट करते है और खानें में बहुतही पंचपक्वान बनाते है।और अपने अन्य धर्मीयं भाईयों को भी भेट स्वरूप देते है।बच्चों के लिए भी सांताक्लॉज कोई ना कोई उपहार लाता है इसलिए बच्चों में भी सांताक्लॉज बहुतही प्रिय है।
प्रभू यीशु को ईश्वर का एक महान दुत माना जाता है।क्यों की उन्होनें सभी मानवजाती के दुखों को दूर करनें के हमेशा अविरत प्रयास किया है।यह मानव उद्धार का काम करते वक्त बहोत परेशानीयाँ आयी।पर धीरे धीरे उनके अनुयायीयों की संख्या बढने लगी।उन्होनें अपने ग्यान से समाज का अंधकार दुर किया।लोग उन्हें मुक्तीदाता कें रुप में स्वीकार करने लगें।प्रभु यीशु मसीह नें बहुतही साधी सिंपल रहन-सहन की जिंदगी अपनायी।
इसाईयों का विश्वास है की, प्रभु इसा मसीह अपने कथनानुसार वे तिसरें दिन पुन:जीवीत हो गये थे।उसमे समस्त मानवजाती के कल्याण की भावना थी।इसा मसीह ने अपना सर्वस्व ईश्वर के चरण में ही अर्पण किया था।
इसलिए यह क्रिसमस का त्यौहार समस्त मानवजाती के लिए बहुतही कल्याणकारक है।
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