The Secret के महान सिद्धांत सें अपनी किस्मत बदले!आकर्षण का सिद्धांत ही सिक्रेट है।इसे बारीकीसें समझें और वह सबकुछ पाएं जो आप पाना चाहते है।
The Secrete book का आधार:
दोस्तों ये किताब दुनिया की सबसे popular book है।पर इस किताब की ऐसी क्या खासीयत होगी जिसे ये किताब दुनिया की बेस्ट किताब की रुप में सामने आयी?
इस किताब का आधार है।एक ऐसा नियम जो Universal है।जो वैज्ञानिक है।जो भुतकाल में भी सत्य था जो आज भी सत्य है।और भविष्य में भी रहेगा।दुनिया बदल सकती है।लेकीन यह नियम नहीं बदल सकता।यह नियम एक प्राकृतिक है।यह नियम जब हमारा ब्रम्हांड निर्माण हुआ था।तब से यह नियम अस्तित्व में है।यह नियम सर्वव्यापक है।इसी नियम सें दुनिया चलती है।हम इन्सान भी इसी नियम का परिणाम है।हम इसी नियम सें चलते है।चाहे यह नियम हमें पत्ता हो या ना हो।पर हम इसी नियम का फल और परिणाम है।यह नियम कालातीत है।आखीर उस नियम को क्या कहते है?
वह नियम है...''आकर्षण का सिद्धांत''
हां..दोस्तों आकर्षण का सिद्धांत ही वह नियम है।जिसें अंग्रेजीं में The Law of attraction कहते है।दोस्तों यह नियम ही इस महान Book का आधार है।इसी आधार पर यह किताब रची हुयी है।यही वह नियम है जो शाश्वत है।यह नियम हम दुनिया के किसी भी कोनें में गये तो हमारे लिए यह काम करता है।
यह नियम हमें क्या देता है?
यह नियम हमें सब कुछ देता है।प्यार, खुशियाँ,पैसा, धन,दौलत, किस्मत, भविष्य, अच्छी सेहत सब कुछ।
आप सोच रहें होंगें की कैसें मुमकीन है?
पर दोस्तों यह मुमकीन है।और आगे में इसके बारें में जैसे जैसे विस्तार सें बतातें जाऊगाँ वैसें ही आपको यह यकीन हो जाएगा की Wow..यह तो सचमुच ही काम करने लगा है या काम करता है।और हम इसी नियम का एक अच्छा या बुरा परिणाम है।
मै अच्छा या बुरा इसलिए कह रहा हुँ दोस्तों क्यों की हम जिस तरह सकारात्मक या नकारात्मक सोचतें है तो यह नियम हमें वैसें ही परिणाम देगा जैसा हमनें सोचा था।
आकर्षण के सिद्धांत में हमें किस तरह सोचना चाहीए?
दोस्तों हमें इस नियम सें अगर कुछ भी पाना है तों पहलें हमें किस तरह से सोचना चाहीए ये सिखना होगा।जैसा की हमं अगर किसी व्यक्ती के बारें में सोचते है और अगर हम उस व्यक्ती को अपने जीवन में पाना चाहते है तो हमें उसके बारें में हमेशा सकारात्मक Positive ही सोचना है।कभी कभी हम खुदपर ही शक पकडते है।और हमें हमारी सोचनेवाली शक्ती के उपर भरोसा नहीं होता है।तो यह आकर्षण का सिद्धांत हमारे लिए काम नहीं करेगा।क्यों की हमारा खुद के उपर ही भरोसा नहीं होता।
हम जादातर निगेटिव्ह ही सोचते है।यह एक मानसिक कारण है।
हम जादा निगेटिव्ह क्यों सोचतें है?
दोस्तों हम जादा निगेटिव्ह क्यों सोचतें है क्यों की हमें उस आकर्षित करनेवाली चीज के बारे में सबकुछ पता होता है।अगर हम एक अच्छी कार,एक अच्छा घर,एक अच्छा जीवनसाथी भरपूर पैसा आकर्षित करना चाहते है तो हम पहलें ये सोचतें है की उस कार Afford करने की हमारी हैसीयत ही नहीं।हम पहले अपने जेब की तरफ देखतें है।हमारी आर्थिक Income की ओर देखतें है।और जैसे ही हमें पता लगता है की हमारी उस कार को,उस घर को खरीदनें की क्षमता नहीं तो हम उस आकर्षित करनेवाली चीज के बारें में नकारात्मक Negative हों जातें है।यही वह वजह है की हम जल्दी निगेटिव्ह क्यों हो जाते।
'द् सिक्रेट' के नियम को इससे कोई लेना देना नहीं की आप के जेब में पैसा है या नहीं।
हा..सच में इस नियम को इस बात सें बिलकुल भी लेना देना नहीं की आपके जेब में पैसा है या नहीं।यह नियम सिर्फ इतना जानता है की आप किस तरह और कितनी गंभीरता सें सोचतें हो।
आकर्षण के सिद्धांत को अगर आप अंंमल में लाना चाहते हो तो उसकी प्राथमिक सिडी:
अगर इस नियम को आप अंमल में लाना चाहते है तो आप इस पर शक करना बंद कर दे और खुदपे भरोसा करना शुरू कर दें।यहीं इस नियम कों अंंमल में लाने की पहली और सबसे महत्वपुर्ण बात है।दोस्तों अगर हमें अपने मन मुताबीक रिझल्ट पाना है तो उस चीजं के गहराईं में मत जाना है जीसें हम आकर्षित करना चाहते है।हमें सिर्फ आँख बंद करके उसपर छोड देना चाहीए।
बाकी बातें हमें सृष्टी पर छोड देनी चाहीए।
दोस्तों आपमें सें बहुत लोगों को लग रहा होगा की ये पागलपण है।दोस्तो आप इसे पागलपण समझें या कुछ भी समझें पर आपको यहीं करना होगा।आप चाहे इसे पागलपण ही क्यों ना समझें।अगर आप सचमुच उस चीज के बारें में पागल Serious है तो आप उसे पाकर ही रहेंगे।क्यों की एक पागल आदमी किसी भी बात पर शक नहीं करता।
इस महान सिद्धांत सें दुनिया के लाखों-करोडो लोगों ने अपने जीवन में प्यार,खुशीयाँ, पैसा, धन,सेहत पायी है।यह अंधविश्वास नहीं है यह एक नैसर्गिक सिद्धांत है।इस महान सिद्धांत के बारें में दुनिया में जितने भी महान लोग होकर गये है वे सभी इसके बारे में जानते थे।चाहे वे अल्बर्ट आईन्सटाईन हो,चाहे न्युटन हो,चाहे अरीस्टाटल हो,चाहे वे जेफरसन हो,चाहे वे रूसो हो,चाहे डॉ. आंबेडकर हो चाहे म.गांधी हो,चाहे विवेकानंद हो,मदर टेरेसा हो,नेल्सन मंडेला हो कोई भी हो।जितने भी महान लोग होकर गये है वे सभी इस सिद्धांत को जानते थे।
अगर हम किसी चीजं को पुरी सिद्दत सें चाहें तो तुम्हैं उस चीजं को मिलानें के लिए पुरी कायनात जुड जाती है।
हांं..!दोस्तों, आपने यह शाहरुख खान का फेमस डायलॉग जरूर सुना होगा।तो शाहरुख खान अपने उस डायलॉग में शिद्दत सें चाहनें को कह रहें है।शाहरुख खान जो कह रहे है वहीं हमें इस नियम को अपनाते वक्त अंमल करना है।
अगर हमें कुछ अपने जिंदगी में आकर्षित करना है तो इस तरह सोंचे जैसा की वो चीज हमें मिल चुकी है ना की वो चीज हमें मिलनेवाली है।
दोस्तों अगर हमें इसका तुरंत रिझल्ट चाहीए तो हमें इस तरह सें सोचना चाहीए जैसे वो चीज हमें मिल चुकी है।ना की वो हमें आनेवाले कुछ महीनों में या आनेवाले कुछ सालों में मिलनेवाली है।
हमें ऐसें Act या React करना है जैसे वो चीज हमें मिल चुकी है।हमें वैसें ही Feel करना है जैसे कोई चीज हमें मिलने के बाद करते है।यहीं इस सिद्धांत का केंद्र है।
आकर्षण के सिद्धांत से अपना जीवनसाथी कैसें पाएँ?
आकर्षण के सिद्धांत सें हम अपना मन मुताबीक जीवनसाथी पा सकते है।अगर हमें कोई व्यक्ती बहुतही पसंद है और उसे आपको पाना है तो आप उस तरह Feel कर सकते है जैसे वह व्यक्ती आपको मिल चुका हो।हमें वैसें ही खुश रहना है जैसे हम उस व्यक्ती को पाकर रहतें है।
आकर्षण के सिद्धांत सें अच्छी सेहत कैसे पाए?
दोस्तों अगर आकर्षण के सिद्धांत सें हम अपनी सेहत तंदुरुस्त और निरोगी करना चाहते है तो हमें ठिक वैसें ही सोचना और feel करना चाहीए जैसा एक शारीरिक और मानसिक रूप सें एक तंदुरुस्त आदमी सोचता है।हमें हमारें हर एक अवयव Body Organ को ठिक सें समझना चाहीए।
दोस्तों आकर्षण के नियम से बडे-बडे रोगीं भी ठीक हो चुके है।कँन्सर और एड्स के भी मरीज ठिक हो चुके है।यह इसी नियम का कमाल है।
आकर्षण के सिद्धांत सें पैसा,धन,दौलत कैसें पाए?
दोस्तों हम में सें अधीकतर लोग इसपर विश्वास तो करते है शुरुवाती दौर में इसपर अंमल करने की कोशीश भी करते है।पर बाद में हम बोअर हो जाते है।और इसे छोड देतें है।और हमारा रिझल्ट और नजिक आनें के बजाय दुर चला जाता है।
तो हमें अगर इसको वास्तविक रुप देना है तो इसे हमें इसें लगातार करना चाहीए।निरंतर काम करना इसका मुख्य केंद्र है।इसे आपको समझना चाहीए।
अगर हम इस सिद्धांत के जरिए पैसा आकर्षित करना चाहते है तो हमे ऐसे बदलाव लाने है हमारें स्वभाव में जैसे एक पैसेवाला आदमी के स्वभाव में रहतें है।
यहीं नियम आप हर जगह हर चीज पर लागु करना है।जिसे हम आकर्षित करना चाहते है।यहीं इस आकर्षण के सिद्धांत का सार है।
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