आकर्षण का सिद्धांत ही सीक्रेट है,इसे आसानीं सें समझें और पाएँ एक बेहतरीन जिंदगी। द् सिक्रेट के इस महान सिद्धांत को बारीकेंसें समझें।
दोस्तों 'द् सीक्रेट' नामक किताब में एक नियम है और वो है आकर्षण का सिद्धांत।इसी के उपर आधारित यह दुनिया की सबसे Popular किताब है।बहोत लोग Confuse होते है की,सीक्रेट मतलब क्या है?मै आपको बहुतही आसानी सें बताता हुँ।सीक्रेट मतलब 'आकर्षण का सिद्धांत' Law of attraction यह पहला Doubt Clear हो गया।तो यहीं वह प्राथमिक बात है जो की बहुतही महत्वपूर्ण है जीसे हमें यह किताब पढनें सें पहलें समझना चाहीए।तो दोस्तों आज हम इस किताब के ऐसेही कुछ छोटे छोटे फर्क समझेंगे।ताकी हम इस महान सीक्रेट नियम को आसानी सें अपनी जिंदगी में लागु कर सके और उससें अपने सपनें पुरे कर सके।
आकर्षण का सिद्धांत क्या है?
आकर्षण का सिद्धांत एक वैश्विक, Universal प्राकृतिक नियम है।जो दुनिया में,पुरें विश्व में,पुरे ब्रम्हांड में मौजुद है।और यह नियम ब्रम्हांड में जीतनी भी सजीव और निर्जीव वस्तु,चीजें है उसकें लिए यह अविरत काम करता है।चाहे इस सिद्धांत के बारें में कोई जानें या ना जानें पर यह नियम हर किसी के लिए काम करता है।और हम सब इसी सिद्धांत सें आपस में जुडे है।चाहे हम दुनिया कें किसी भी कोनें में हो, हम एक दुसरें सें जुडें है।
आकर्षण का सिद्धांत काम कैसें करता है?
दोस्तों आकर्षण का नियम अपने आप में एक परिपूर्ण नियम है।यह सोचता नहीं की आप इसकें बारें में गलत धारणाएँ लेकर देखते है या इसपर आप विश्वास करते है या नहीं करते है।लेकीन यह नियम हमेशा काम करते रहता है।इसका आप तक पोहचनें का जरीया आपके विचार है।विचारोंसें आकर्षण का सिद्धांत आपने अंदर पोहचता है।हम किस तरह सें सोचते है?हम सकारात्मक सोचतें है या नकारात्मक इस बात सें उसें कोई लेना देना नहीं है।बस आप सोचतें है और कितनी गंभीरतापुर्वक सोचते है इसी बात पर आकर्षण का सिद्धांत हमेशा काम करता है।
आकर्षण के सिद्धांत का स्त्रोत:
आकर्षण के सिद्धांत का स्त्रोत है आपके विचार।जी हाँ..आपके विचारों सें ही यह सिद्धांत आपके अंदर प्रवेश करता है।जब भी हम कुछ सोचते है।चाहे वह नकारात्मक हो या सकारात्मक हो उसी के जरीये आकर्षण का सिद्धांत हमारे लिए काम करता है।अगर हम अच्छा सोचतें है तो आकर्षण का सिद्धांत हमारें लिए अच्छा ही काम करेगा।और अगर हम कुछ नकारात्मक, गलत तरीकेंसे सोच रहें होंंगें तो यह नियम आपके लिए गलत मतलब नकारात्मक ही काम करेगा।
आपका सोचना ही आकर्षण के सिद्धांत को सिग्नल देना है।हम जैसा सोचतें है वैसा ही सिग्नल आकर्षण के सिद्धांत कें पास जाता है और वह नियम तुरंत उसपर काम करना भी चालू कर देता है।वो नियम यह नहीं देखता की आप कैसें सोचते है।या आपने किस तरह सें सोचा है।यह उसका काम नहीं है।उसका काम सिर्फ आपने दिमाग सें सिग्नल लेना और उसपर अंमल करना।
आकर्षण कें सिद्धांत को मेनु कार्ड क्यों कहा गया?
हाँ..यह नियम एक मेनु कार्ड ही है।मैने आपने जिंदगी में इसें खुद अजमाया है।और बडे बडे वैज्ञानिक भी यह बात मानते है की आकर्षण कें सिद्धांत सें हम कुछ भी माँग सकते है।यह वाकई एक मेनू कार्ड की तरह है।जैसा की हम किसी होटल में जाते है।उसके बाद हम मेनू कार्ड देखकर हमारी पसंद की डिश मंगवातें है।जैसें ही हम वह मंगवातें है,वैसें ही उस होटल का वेटर हमारी पसंदीदा डिश हमारें लिए लेकर आता है और हम उसे आराम सें खाकर खुश हो जातें है।ठिक वैसें ही आकर्षण के सिद्धांत का यह नियम एक मेनू कार्ड की तरह है।जो हम अपनें दिल-दीमाग में जो भी सोचतें है उसको यह नियम पुरा करता है।
आकर्षण के सिद्धांत को अंमल में लानें की प्राथमिक सिढी:
दोस्तों आकर्षण का सिद्धांत तो सबके लिए काम करता है पर इसे अंमल में लानें का तरिका भी है।अगर आप उस तरिकेसें किसी चीज को आकर्षित करते है तो यह नियम आपके लिए Proper तरिकेंसें काम करेगा।और वह नियम यह है की आप जो भी अपने जिंदगी में पाना चाहतें है तो उसे इस तरह सें आकर्षित करो की वो आपको मिलनेवाला है,इस तरह सें नहीं बल्कि वह आपको मिल चुका है।और जैसा आप वह वस्तू एंवम चीजं प्रत्यक्ष रुप सें मिलने के बाद महसुस करते है ठिक वैसें ही उसे महसुस करना होगा यह इसकी प्राथमिकता है।अगर आप इसे नहीं समझें तो यह सिद्धांत आपके लिए काम नहीं करेगा।
आकर्षण के सिद्धांत का वर्तमान रुप आप खुद हों।
यही इसका सबसे बडा सबुत Proof है।
हाँ...मै इसे अभी दौ मिनट में सिद्ध Prove करके दिखाऊगाँ।यह पेराग्राफ पढनें के बाद आप खुद बोलोंगे की बात तो सही है।हाँ मै हमेशा Practically बोलता हुँ।देखो अभी हमारा शरीर, हमारा दिमाग,हमारी वर्तमान आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक,पारिवारिक स्थिती जो भी है,जीस तरह सें है,अच्छी-बुरी यह हमारे आज तक के सोचने का परिणाम है,उसीका नतीजा है।अगर हमारे पास पैसा जादा है तो भी हम इसका परिणाम है,कम है तो भी हम इसीका परिणाम है।हमनें जैसा सोचा था ठिक वैसा ही पाया है।
तो यही इसकी प्राथमिकता है इसे हमें समझना चाहीए।तभी हम अपने मनमुताबीक Result पा सकते है।
-Kiran Chawre
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