Republic day 2020 भारतीय लोकतंत्र दिन,वर्तमान राजनिती एंवम राजनैतिक दलों की भुमिका और जनता का उत्तरदायित्व। भाग-२
दोस्तों, आज हम २१ वी सदी में जी रहे है।आज हमारा वर्तमान भारत ७३ साल का हो चुका है।हमारें देश को आझाद करनें में कई लोगों नें अपनें प्राण के बलिदान दिये है।करीब १५० साल की अंग्रेजों की गुलामी हमारें वीर भारतीय योध्दाओंने खत्म कर दी और जिसें सोने की चिडीया कहा जाता है उस भारत देश को आझाद करवाया है।यह काम आसान नहीं था।इस काम को सफल बनानें में हजारो लोगों कें घर बरबाद हो गये थे।उनकी बीवीयाँ, बच्चे, रिश्तेदार,धन,दौलत उनकें सपनें तबाह हो गयें थे। तब जाकर हमारा भारत देश आझाद हो गया।यह काम बहुतही कठीण था पर हमारें स्वतंत्रसेनानीयों ने उसे करके दिखाया है और हमारें मुल्क को अंग्रेजों से आझाद कराकें हम सबको मुक्त कर दिया है।लेकीन यह लढाई यही खत्म नहीं हुयी थी।अस्सली लढाई तो बाकी थी और वह लढाई थी की अब यह भारत देश चलेगा कैसें याने भारत का संविधान।.
भारत का संविधान लिखना और उस संविधान पर आझाद हुए भारत को चलाना यह थी अस्सली लढाई।भारत का संविधान कौन लिखेगा?यह महान जिम्मेदारीं कौन उठाएगा?यह बहोत बडा सवाल हमारें भारतीय तत्कालीन नेताओं के सामने पडा था।क्यों की आझादी तो मिली थी पर क्या आझादी सें ही सबकुछ मिलनेवाला नहीं था।आझादी मिलना और उस आझादी को बनाए रखना दौ अलग अलग बातें है।इसे अलग अलग टर्मिनोलोजी में सोचना चाहीए।क्यों की बहोत सारे लोग यही सोचतें है की आझादी ही सबकुछ है।आझादी मिली तो सबकुछ मिल गया।और यह ऐसा सोचनें में अनपढ लोग तो है ही पर उनमें शिक्षित लोगं भी शामील है।वे शिक्षित लोग संविधान को भुल ही जाते है।जो सबसे जादा महत्वपुर्ण और एकदम मुलभूत है।
हम बगैर संविधान के हमारें इस भारत देश को एक दिन भी नहीं चला सकतें है।क्यों की दुनिया का कोई भी देश हो उसें अपने अपनें हिसाब सें कानून की जरूरत होती है।बगैर कानुन के बगैर नियमों कें बगैर संविधान के कोई भी अपना देश नहीं चला सकतें है।तो यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारीं हमारें देश के सामनें खडी थी।एक तो संविधान बनाना यह एक सवाल खडा था और दुसरी जिम्मेदारी यह थी की इतनें बडे देश का संविधान कैसें और कौन लिखेगा।क्यों की भारत देश कोई अन्य मुल्कों की तरह छोटासा देश तो है नहीं और नाही इसमें अन्य मुल्कों की तरह एकही मजहब,एकही पंथ,जातीयाँ है।
भारत में बहुतही बडे पैमानें पर अलग अलग धर्म,जातीयाँ,पंथ,गुट आदी हजारो सालों सें चली आ रही थे और खास बात यह थी की,इतनी सारी जातीयाँ,धर्म, मजहब वे लोग उसें छोडना नहीं चाहते थे।वे सब अपनी अपनी जाती को लेकर अभिमान और उसपर गर्व महसुस कर रहे थे जो की किसी भी देश कें लिए यह बहुतही घातक और विध्वंसकारी था और ऐसें देश का संविधान बनाना बहोतही चुनौतीपुर्ण काम था।
ऐसें जटील परिस्थिती सें भारत गुजर रहा था और इसका संविधान लिखना उतनाही कठीण काम था।लेकीन यह जिम्मेदारीं भी हमारें पुरखों ने बखुबी उठायी और हमारा संविधान लिखनें की जिम्मेदारी भारत देश नें महामानव बाबासाहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर पर सोपं दी।क्यों की भारत में उनके अलावा कानुन का जानकार और कोई नहीं था।उन्होंने अन्य देशों कें संविधान और कानुन का भी बहोत गहराई सें अध्ययन किया था।उनकी अलौकिक बुध्दी का प्रभाव और तेज पुरे भारत के बडें बडें नेताओं पर था।उन्होने अपनी उच्च शिक्षा अमरिका,इंग्लंड,जर्मनी जैसै देशों में कियी थी।उनकें बुद्धी का प्रभाव पुरें भारत देश पर पडा था।भारत के सभी सिनियर नेताओं को कहना था की भारत के संविधान को सिर्फ बाबासाहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ही आकार दे सकतें है वे ही इस भारत का संविधान लिख सकतें है।
तो आखीरकार यह संविधान लिखनें की जिम्मेदारी बाबासाहब डॉ.भीमराव अम्बेडकरजी नें ही उठायी।बाबासाहब के पहले भी संविधान लिखनें के बहोत प्रयास हूए।मोतीलाल नेहरू और सप्रु कमीटी नें भी संविधान लिखनें का प्रयास किया था।लेकीन उनके लिखे संविधान को बाद में कचरें की डिब्बें में फेंक दिया गया।ऐसें अनेक प्रयास किये गयें।पर वे अपनें संविधान लिखनें के प्रयास में असफलही रहें।
पर बाबासाहब डॉ.भीमराव अम्बेडकरजी नें जो संविधान लिखनें का महानत्तम प्रयास किया वह प्रयास ही सफल रहा है यह हमारें देश कें लिए बहुतही गौरव और गर्वं सें सिन्ना चौडा कर देनेवाली बात है।बाबासाहब अम्बेडकर ने जो संविधान लिखा है यह बात इतनीं बडी और इतनीं महान है कीं आजतक हमारा भारत देश अपनी आझादी बनाएं रखा है और हम पुरें दुनिया कें सामने अपनी एकता सें खडें है।आज हमारा देश पुरी दुनिया में एक विकसनशील और मजबूत राष्ट्र कें रूप में खडा है।इसका पुरा श्रेय हमारें संविधान निर्माता बाबासाहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर जी को जाता है।
भारत को इन महान लोगों ने एक नया आकार नया आयाम और एक नयी शती प्रदान कियी।ऐसा क्यों संभव हुआ?इसका क्या कारण था?आखीर क्या वजह थी?
इसकी अस्सली वजह थी उन लोगों का मकसद निर्धारित था।
उन लोगों के राजनैतिक संकल्पनाएँँ Political Concept स्पष्ट थी।
उन लोगों का अपनी जनता के प्रती लगाव था।ना की अपने परिवार सें ही लगाव था।
वे लोग स्वार्थी या स्वंयकेंद्रीत नहीं थे।वे बहुतही उदारमतवादी थे।
वे लोग अपनें अपनें क्षेत्र में बहुतही प्रभावशाली थे और उन्होंने शिक्षा पानें के लिए कठोर से कठोर प्रयास करके राजनिती में आये थे।
वे लोग अपनी नितीमत्ता और चारित्र्य सें संपन्न व्यक्तीत्व वाले लोग थे।उनमें से जादातर लोगों का व्यक्तीत्व स्वच्छ और पवित्र था।
वे लोग खुद से जादा अपनें परिवार सें जादा समाज और देश को महत्त्व देनेवाले थे।
उन लोगों ने आज के नेता की तरह कभी भी ऐशोरामों की जिंदगी नहीं अपनायी थी।इसलिए उनकें हाथों राष्ट्र का निर्माण हो गया।यह कार्य बहुतही जटील और उतना ऐतिहासिक रुप सें महत्वपूर्ण भी था।इसलिए यह सब मुमकीन हो गया।
पर असली सवाल यह है की क्या आज के वर्तमान नेता आज की तारिख में लोगों के हित में,लोगों के कल्याण में राजनिती कर रहे है या नहीं?इसे हमें परखना होगा।
तो इसका जवाब हाँ और ना दोनों में दिया जा सकता है।क्यों की,अगर हम सिर्फ निगेटिव्ह ही सोचें तो उसकी एक साइड जो की सकारात्मक याने की पाँझीटिव्ह साइड रह जाएगी।इसलिए हम दोनों तरफ सें विचार विमर्श करेंगें और ऐसा करना ही हमारें लिए उचीत होगा।क्यों की एक बुद्धीजीवी वर्ग या व्यक्ती हमेशा सें दोनों साइट सें सोचता करता है या किसी भी परिस्थिती को देखता है।
देखीए आज वर्तमान में कइ सारे नेता है जो बहोत पढे लिखें भी है और उन्हें संविधान का अच्छा अध्ययन भी है और निसंदेह वे राजनीती भी अच्छी करते है।पर आज उसके विपरीत बहोत बडे पैमानें पर ऐसें भी नेता है जो समाज में,देश में गलत राजनीती करकें सिर्फ अपना हित नजर के सामनें रखकर काम करतें हैं।उन्हैं राष्ट्र, समाज की बिलकुल भी परवाह नहीं होती।वे राजनीती में सिर्फ एक ही मकसद सें आतें है जो है स्वंयविकास,खुद का भला,या अपनें आनेवाली पीढीं का भल्ला।उनकें पास लंबी सोच है लेकीन वह अपनें परिवार कें लिए है समाज या देश के लिए नहीं।
आज के वर्तमान नेता कें पास अच्छी उच्च शिक्षा तो है पर उसका फायदा समाज कें लिए नहीं, अपनें लिए और अपनी आनेवाली पीढीयों कें लिए है।उनकें पास योजना भी है पर खुद के लिए है जनता या समाज कें लिए नहीं।वे दिन रात मेहनत तो करतें है पर समाज के लिए या देश के लिए नहीं बल्की अपनें लिए है।वे आपको दिखायेंगें की,आपकी उनकों बहुतही फिक्र है पर उनकों अस्सल में अपनीं फिक्र रहती है।वे बडे बडे नारे लगाएंगें,वे बडे बडे वादे करेंगें पर उसें पुरा नहीं करेंगें।वह चुनाव के वक्त आपके पैर पडेंगें पर चुनाव जीत जानें के बाद आप पैर भी पकडें और मर भी गये तो आपको अपना चेहरा नहीं दिखाऐंगें।वे खुदके पब्लिसिटी कें लिए करोंडों रुपये खर्च करेंगें।वे खुद के कल्याण के लिए तुम्हारें सामने झुकेंगें पर वे स्वंयम का ही कल्याण और स्वंयम के उद्धार के बारें में सोंचेंगे।
क्या आज की राजनीती हमारें संविधान के अनुसार चलती है और क्या आज के नेतागण संविधान के अनुसार राजनिती चलातें है।
इसका जवाब तो ९९:९९% प्रतीशत नकारात्मक ही देना होगा।क्यों की भारत में कितनें ऐसें नेता है जो संविधान की स्टडी या अध्ययन करतें है।भारत कें कितनें लोगों का संविधान के उपर अच्छा खासा कमांड है।बहोतही कम राजनेताओं का संविधान के उपर अध्ययन है।कमांड तो दूर की बात है संविधान की प्रास्ताविक भी नेताओं को मालुम नहीं है।ऐसी भीषण स्थिती भारत में है।यह किसी भी देश के लिए घातक साबित होनेंवाला है।
क्यों की जो लोग देश चलातें है उनकों अगर संविधान का ग्यान नहीं है तो आगे चलकर देश का भविष्य क्या हो सकता है यह बात अलग बतानें की जरुरत नहीं है।जो लोग देश का कारोभार देखतें है उन्ही लोगों कों संविधान का एक अक्षर भी नहीं पता है तो इतनीं शर्मवाली बात और कोई नहीं हो सकती।संविधान ने सबको शिक्षा का अधिकार दिया है।उस शिक्षा को लेकर अगर हमारें नेता संविधान कें बारें में सजग नहीं है तो उस देश की जनता का तो सवाल ही नहीं उठता है।
ऐसा क्यों हुआ?
इसका मुख्य कारण यह है की आज तक कें नेताओं नें या जो भी सत्ताधारी राजनैतिक दलोंनें कभी भी हमारें अंदर याने की देश की जनता के अंदर संविधान के बारें में सजगता या संविधान कें बारें में जागृती,संविधान के उपर सरकारी स्कुलों में चर्चा,परिषदों का आयोजन, बडे बडे प्रोग्राम, संविधान संस्कृती कें उपर पहिली कक्षा सें ही सिलेबस लागु करना आदी बातें आज तक कें सरकारों नें कियी होती तो संविधान का ग्यान नेतांओं का होता।
संविधान का ग्यान जनता को नहीं यह हमारी समस्या नहीं है,बल्की संविधान का ग्यान हमारें नेताओं को भी नहीं यह अस्सली और मुख्य समस्या है।
यह हमारी मुख्य समस्या है और यह समस्या समाज में बरकरार रखनेवालीं व्यवस्था भी देश में काम कर रही है।देश में संविधान को माननेवालों की संख्या नब्बे प्रतिशत है।क्यों की संविधान को माननेवालें लोगों को पता है की इसी संविधान सें इसी दस्तावेज सें सामान्य जनता का भल्ला हो सकता है।यही संविधान समाज में समता बनाए रखेगा और समाज के हर एक कमजोर, दब्बे,कुचलें लोगों का भल्ला करेगा।इसलिए उसें माननेवालों की संख्या में जादा बढोत्तरी हो रही है।
पर संविधान को कमजोर बनानेवालीं भी व्यवस्था यहा काम कर रही हैं।वह व्यवस्था यह नहीं चाहती है की समाज में बराबरी और समता हो।वे यह चाहते है की समाज में हमेशा गैरबराबरी बरकरार रहे।वे ऐसा इसलिए चाहते है की समाज में सबसें उपर वो रहे।इसलिए वे संविधान का कभी भी प्रचार और प्रसार नहीं करेंगें।इसलिए समाज में संविधान को लेकर जागरूकता नहीं है।यह है इसकी मुख्य वजह।
और जो लोग संविधान के एक्सपर्ट,विशेषग्य है वे कभी भी राजनीती में नहीं आएंगे।क्यों की हमारें देश में राजनिती को लेकर एक ऐसा गलत माहौल निर्माण कर दिया है की उसें देखकर ही विद्वान लोग उसें दुर भागते है और आयसोलेशन में बैठकर अपनी राय,अपना ओपीनीयन बताते रहतें है।यह भी बात गलत है।इसलिए संविधान संस्कृती हमारें समाज में मुल रूप सें मजबूत नहीं हो रही है।
आज संविधान कें जो प्रोफेसर है वे लोग भी संविधान में खोज,संशोधन नहीं करते।उसमें रूची नहीं दिखातें।बहोत सारे प्रोफेसर लोगों की अंग्रेजी भाषा की समस्या है।वे अपनी अपनी भाषा में संविधान पढना चाहते है।वे अंग्रेजी में रूची नहीं दिखातें है और अगर वे कभी कभार अपनी मातृभाषा में पढना भी चाहे तो संविधान के जटील अनुच्छेदों और प्रोव्हीजन्स के वास्ते वे पढ नहीं पातें है।उनको वह जटील कार्य लगता है।ऐसी स्थिती आज के वर्तमान में है जो की बहुतही निराशाजनक है।
भारत में प्रजासत्ताक दिन एंवम गणतंत्र दिन का महत्त्व सबसे जादा है।इसी दिन १९५० को हमारा संविधान पुरे भारत वर्ष में लागु हुआ था।तब सें लेकर आजतक संविधान का अंमल कितना हुआ? उसमें कितनें संशोधन हुये ?वह संशोधन देश हित में किये गये या फिर सत्ताधारी पार्टीयों नें अपने स्वार्थ के लिए संविधान संशोधन किए इसपर हमें गहराई सें सोचना होगा।आजतक तो जादातर संशोधन पार्टीयों ने अपनें निजी स्वार्थ के लिए अपनें अनुसार किये थे।यह बात एक लोकतांत्रिक देश में तो विघातक है।
क्या हम हमारें इस गणतंत्र को संविधान को लेकर इन सब बातों का ध्यान रखकर आपनेआप में कुछ बदलाव करेंगें?जिसें हमारें संविधान की पुरी अंमलबजावणी हो सकें।या हर साल की तरह इस साल के गणतंत्र को जानें देंगे।हमारी अकार्यक्षमता ही हमारें कल्याण में रुकावट हो रही है।
-अँड.किरण चावरे उच्च न्यायालय,मुंबई.
Best article on Republic day it's very useful
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