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पती-पत्नी या किसी भी कपल में झगडें क्यों होते है ?इसके मुख्य कारण और उसपर बेहतरिन उपाय!अगर आप यह करतें है तो आपकें रिश्तें सात जन्मों तक मजबूत रहेंगें।

दोस्तों, आज हम सबसें महत्वपूर्ण विषय पर बात करनेवालें है जो हमारी दैनंदिन जिंदगी सें जुडा है और वह है पती पत्नी के बीच होनेंवालें झगडें या लढाईयाँ।यह विषय इतना प्रासंगिक और इतना महत्वपूर्ण है की दुनिया का हर कोई आदमी हो या औरत इससे झुज रहा है।दुनिया कें हर एक कपल में लढाईयाँ होती है हम देखते है।चाहे उस जोडी नें शादी कियी हो या फिरे वे बिना शादी कें ही रिलेशनशिप में हो उनमें झगडें और लढाईयाँ अब आम बात हो गयी है।उस झगडें को जाती,धर्म, मजहब,देश की सीमा नहीं है।चाहे वह कपल्स किसी भी जाती या धर्म के हो चाहे वे कपल्स दुनिया कें किसी भी देश सें हो उनमें झगडें और लढाईयाँ है।

आखीर इसका क्या कारण है?

यह बात इतनीं आम होनें के बावजूद भी लोग शादीयाँ क्यो करतें है?क्यों रिलेशनशिप में जाते है।क्यों रिलेशनशिप बनातें है?यह सवाल बहोत लोग पुछतें है।पर यह सवाल ही गलत है।अगर पती पत्नी या किसी अन्य कपल्स में अगर झगडें होते है लढाईयाँ होती है तो उसका यह सोल्युशन नहीं है की शादी ही ना करना।तो इसका यह सोल्युशन है की जिस बात को लेकर झगडें हो रहें है उस बात की जड़ क्या है?आखीर किस वजह सें हमारें रिश्तों में यह झगडें होतें है या फिर हो रहे है यह सोचना और उसपर सोल्युशन निकालना यह इसपर मुख्य और सटीक उपाय है।लेकीन इसकें उपाय पर हम बाद में बात करेंगें।पहलें यह जानतें है की इस लढाई झगडें की अस्सली वजह क्या है?


पती पत्नी के बीच लढाईयाँ और झगडें कें कुछ मुख्य कारण

१.रिश्तों में एक दुसरें को समय ना देना:

२.रिश्तों में एक दुसरे को सिर्फ निगेटिव्हटी सें ही देखना:

३.रिश्तों में एक दुसरें का Intention समझं ना लेना:

४.रिश्तों में एक दुसरे को कोसतें रहना:

५.रिश्तों में एक दुसरें सें जादा अपेक्षाएँ रखना:

६.रिश्तों में जिम्मेदारीयों,कर्तव्यों का अहसास कम और हक्क, अधिकार का अहसास जादा होना:

७.रिश्तों में शारीरिक सुख को लेकर अवास्तव अपेक्षाएँ रखना:

८.रिश्तों में एक दुसरें कें ओपीनीयन को महत्त्व ना देना:

९. रिश्तों में एक दुसरें कें उपर शक करना।

१०.रिश्तों में एक दुसरों की तुलना किसी और कें पार्टनर सें करना।

११.रिश्तों में एक दुसरों कें रिश्तेदारों पर उंगलीयाँ करना:

१२.रिश्तों में आमदनी अठनी और खर्चां रूपया होना:


इस वजह सें पती पत्नी या अन्य कपल्स के बीच लढाईयाँ,झगडें होते है।यह है इसकी अस्सली वजह जिससें पती पत्नीयों की बीच हमेशा दरारें पडती है।आयीए हम इस कारणों को अभी विस्तार सें जानतें है।

१.रिश्तों में एक दुसरें को समय ना देना:

दोस्तों पती पत्नी कें रिश्तों में या अन्य किसी भी रिश्तों में एक दुसरें को समय देना ही सबकुछ है।अगर हम रिश्तों में एक दुसरें को समय देते है तो हम अपनें पार्टनर को सबकुछ दे रहे है जिससें अपना रिश्ता सात जन्मों तक टिकनेवाला है।और अगर हम रिश्तों में अपनें पार्टनर को सबकुछ दें रहे हो और सिर्फ समय ही नहीं दे पा रहे हो तो इसका कोई भी मतलब नहीं है।अगर आप अपनें पार्टनर को समय नहीं दें पा रहें हो तो समझों आपका रिश्ता बहुतही जल्दी टुटनेवाला है।इससे और कोई नहीं बचा सकता।


पती पत्नी के बीच लढाईयाँ और झगडें होनें की मुख्य वजह है एक दुसरें को समय ना देना।अगर आप अपनें पार्टनर को समय नहीं देतें है तो इसकें बहोत बुरें अंजाम भी हो सकते है।इसकी वजह सें संसार भी तुट सकते है।रिश्तों में दरारें भी आ सकती है।पती पत्नी का यह पवित्र रिश्ता तलाख तक जाता है।समय ना देनें की वजह सें डिवोर्स तक मामलें जा रहे है।आज भारतीय न्यायालयों में सबसें जादा मुकदमें डिवोर्स कें है जो समय ना देनें की वजह सें गये है।

रिश्तों में एक दुसरे को समय ना देनें के अंजाम:

अगर पती पत्नीयों के बीच जादा झगडें और लढाईयाँ होती है तो इसका मुख्य कारण है एक दुसरें को समय ना देना।अगर हम अपनें पार्टनर को समय नहीं देते है तो हमारा पार्टनर यह सोचेगा की,मेरे पार्टनर का बाहर कोई चक्कर चल रहा है।किसी के साथ अफेअर चल रहा है।या अब मेरे पार्टनर का दिल मेरे उपर नहीं है।अब मेरे पार्टनर का मन भर गया है।इस तरह सें अपना पार्टनर सोचेगा और इस तरह कें विचार मन में आना स्वाभाविक भी है।क्यों की आप समय नहीं दें रहें हो तो आप बाहर किसी और को महत्त्व देनें लगें हो।लेकीन हर बार इसका यही मतलब निकालना सही नहीं है।जादातर अपनी जिम्मेदारीयों की वजह सें भी कभी कभी समय ना देना संभव नहीं होता।

पर अगर ऐसा नहीं है तो फिर अपनें पार्टनर को समय निकालकर समय देना चाहीए।कहते है ना की सात जन्मों तक मुझे यही जीवनसाथी मिलें।ऐसा इसलिए कहा जाता है की,हमें हमारें पार्टनर का सहवास अच्छा लगता है।आजकल समय देनें सें लेकर बहानें बनाना।रोज अलग अलग बहानें बताना इन सब चिजों का जादा इस्तेमालं हो रहा है।पती पत्नी या अन्य कपल्स में दोनों का रिश्ता बहोत अच्छा चल रहा होता और दोनों में सें किसी एक का मन भर गया होता तब समय को लेकर बहानें बनाना चालू होता है।जो अच्छे रिश्तों में बदल जाता है वह किसी भी अच्छे रिश्तों में और किसी के भी अच्छें रिश्तों में बदल जाता है।

रिश्तों में परिस्थिती देखकर,पैसा,धन,दौलत देखकर जो बदल जाते है और अपनें रिश्तों को समय नहीं दे पातें है।अपनें रिश्तों को भुल जाते है।अपनें रिश्तों को समय देनें के लिए बहाणे बनाते है वह चाहे दोनों में सें कोई भी हो वह रिश्तों के लिए बहुतही घातक होते है।ऐसें व्यक्ती किसी के साथ भी रिश्तें के लायक नहीं होते।ऐसे रिश्तों को खुद होकर तोडना चाहीए।ऐसें व्यक्ती किसी भी रिश्तों में जादा देर तक नहीं रह सकतें।ऐसें व्यक्ती यह भुल जाते है की रिश्तों की बुनियाद क्या है।रिश्तों का मुल्य ऐसें लोगों को पता नहीं होता।अगर पता है तो उनको उसकी किमत नहीं रहती है।ऐसें व्यक्ती बाद में बहोत पछतातें है।रिश्तों में समय ना देनें के बहोतही जादा नुकसान है।इसलिए समय का महत्त्व समझें और अपनें रिश्तों को इससें बचाईएँ।क्यों की रिश्तें है तो हम है नहीं तो जिंदगी में कुछ भी नहीं।

२.रिश्तों में एक दुसरे को सिर्फ निगेटिव्हटी सें ही देखना:

आजकल के रिश्तों में अपने पार्टनर को सिर्फ निगेटिव्हटी सें ही देखतें है।जैसे के उसमें सकारात्मक या पोझिटीव्ह एक भी बात ना हो।हम रिश्तों में सिर्फ एक ही नजरियाँ लेकर चलते है और वह है नकारात्मकता या निगेटिव्हटी।चाहे हमारा पार्टनर कितना भी अच्छा क्यों ना हो पर उसमें हमें कोई भी बात अच्छी नहीं लगती।हमारे पार्टनर में अच्छाईयाँ हमें सिर्फ शुरूवाती दौर में ही दिखती है।जब रिश्ता नया होता है तब हम हमारें पार्टनर सें बात करनें कें लिए,बोलने के लिए,तारिफ करनें कें लिए बहानें धूंडतें है।पर वही रिश्ता जब धीरे धीरे पुराणा हो जाता है तब हमे हमारे पार्टनर में कमीया नजर आनें लगती है।यह बात बहोतही घातक और रिश्तों को लेकर विनाशकारी होती है।

सच बात तो यह है की हमारा रिश्ता पुराणा होना ही सबसें अच्छी बात है।रिश्ता पुराणा मतलब दोनों नें भी आजतक रिश्ता बहोतही अच्छी तरिकेसें निभाया है।लेकीन कुछ कपल्स यह सोचतें है की चलो अब यह रिश्ता पुराणा हो गया है।अब इस रिश्तें में जादा इंटरेस्ट नहीं आने लगा है।यह सोचकर वे प्रेम जैसा पवित्र और शादी जैसा पवित्र रिश्ता तोड देतें है।इस तरह की मुर्खताँ बहोतही सारे कपल्स करते है।पर अंत में उनकी जिंदगी नरक जैसी बना लेते है और इसकें लिए वे खुद जिम्मेदार होते है।क्यों की उनकों लाईफ में कुछ नया चाहीए होता है नया।लो नया मिल गया नर्क भरा जीवन।

अगर रिश्ता जादा देर तक टिकता आया है और रिश्ता पुराणा हो रहा है तो यह बात बहोतही अच्छी है।रिश्ता पुराणा हो रहा है मतलब रिश्ता मजबूत हो रहा है।और इसकें लिए हमें अंदरुनी खुशी होनी चाहीए।पर बहोत सारे कपल्स इसकें उल्टा कर देतें है और खुदकी जिंदगी भी बरबाद कर लेतें है।

रिश्तों में एक बात ध्यान में रखनी चाहीए की,जब हम दुसरे कपल्स को देखतें है तो वे हमें हमसें जादा खुश दिखतें है।और जब वे हमें देखतें है तो उनकों हम जादा खुश दिखनें लगतें है।यह बात हमें समझनी चाहीए जो बहुतही महत्वपूर्ण है।अगर हम यह बात समझतें है तो हम अपनें रिश्तों को बचा सकतें है और उसें काफी मजबूत भी कर सकते है।

३.रिश्तों में एक दुसरें का बोलनें का मकसद Intention ना समझं लेना।

रिश्तों में अक्सर देखा जाता है की कपल्स में जब भी कोई झगडें,लढाईयाँ होती है तो कपल्स एक दुसरें पर गाली गलोच करते है।गुस्से में कुछ भी अनाब शनाब बोल देते है।कभी कभी अपनें पार्टनर को थप्पड या चाटा भी लगा देते है।इस परिस्थिती में यह देखना चाहीए की,लढाई और झगडें का मुख्य मकसद क्या है।आखिर किस वजह सें हमारें बीच लढाईयाँ हो रही है।अगर कपल्स में सें कोई एक नें यह कहकर लढाई, झगडें कर रहा है की मुझे समय दो तो यह समय मांगने का कारण और उसका मकसद intention बहोतही अच्छा है।तो इस तरह की परिस्थिती में अपनें पार्टनर को समझ लेना चाहीए।वो गुस्सा इस लिए हो रहा है की उसको अपनें पार्टनर का समय चाहीए और उसें अपनें पार्टनर का ही समय इसलिए चाहीए की वह अपनें पार्टनर को अपनें दिल सें पसंद करता है।इसलिए वह अपनें पार्टनर से समय मांग रहा है और समय ना देनें पर वो गुस्से में आकर कुछ भी बोल रहा है।यहाँ बोलनें का,झगडें करने का मकसद अच्छा है इसलिए मकसद को intention को ध्यान में लेना चाहीए गुस्से में बोले हुए शब्द को नहीं।

४.रिश्तों में एक दुसरे को कोसते रहना:

रिश्तों में जब पती पत्नी के बीच झगडें होते है तो उस झगडें का सोल्युशन क्या है उस झगडें का हलं क्या है इसपर सोचनें कें बजाय पती पत्नी एक दुसरें को कोसते रहतें है ,गाली गलोच करते है,एक दुसरें की कमीयाँँ अपनें बच्चों कें सामनें बतातें रहतें है।इसका परिणाम ऐसा होता है की बाद में जब बच्चें बडे हो जाते है तो वे भी अपनें माँ बाप की इज्जत नहीं करतें है।इसलिए रिश्तों में एक दुसरे को कोसना बहोतही गलत है और इसकें अनंत घातक परिणाम भी है।

५.रिश्तों में एक दुसरें सें जादा अपेक्षाएँ रखना:

अक्सर रिश्तों में यह देखा गया की पती पत्नी हो या कोई और रिश्ता उसमें आपस में एक दुसरें सें अनगिणत और और हद्द सें जादा रखा जाना।रिश्तों में एक दुसरें सें उम्मीदें,अपेक्षाएँ रखना गलत नहीं है।पर अपेक्षाएँ रखते वक्त हम अपनें पार्टनर की परिस्थितीयों का खयाल नहीं करतें है तो यह भी गलत है।हमारा यह सोचना बिलकुल गलत है की हमारा पार्टनर भी हमारी तरह ही वो भी बिलकुल आईनें की तरह ही होना चाहीए तो इस तरह की अपेक्षाएँ और उम्मीद रखना सबसे जादा गलत है।

क्यों की हमारा पार्टनर हमारी तरह ही रहें ऐसी उम्मीद लगाए बैठना बिलकुल गलत है।ऐसा बिलकुल हो ही नहीं सकता।क्यों की हम आपस में एक दुसरें कें अगर जीवनसाथी भी रहें तो और हमारा सात जन्मों का रिश्ता भी जुडा होगा तो भी ऐसा नहीं हो सकता।और यह इसलिए नहीं हो सकता की हम दोनों भी अलग अलग परिवार सें आते है।हमारें दोनों कें घर के संस्कार, शिक्षा अलग अलग होती है।हमारें घर कें हर एक व्यक्ती कें विचार अलग अलग होतें है।हमारी पढाईं अलग अलग गांवों में,अलग अलग स्कुलों में हुयी है।हमारें सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, आर्थिक परिस्थितीयाँ अलग अलग और भिन्न होती है।तो इतना होनें के बावजूद हम अपनें पार्टनर सें यह उम्मीद कैसें कर सकतें है की हमारा पार्टनर हमारी तरह ही बिलकुल आईनें की तरह ही होना चाहीए।यह बहोतही गलत है।अगर हमें रिश्तें निभानें है तो हमें यह मुल सिद्धांत समझना ही होगा।अगर हम इसें नहीं समझतें है तो हमारें साथ वहीं होगा जो आजतक होता आया है।

६.रिश्तों में जिम्मेदारीयों का कर्तव्यों का एहसास कम और हक्क, अधिकार का एहसास जादा होना:

रिश्तों में अगर अपनें कर्तव्यों का अपनी जिम्मेदारीयों का एहसास जादा हो तो रिश्तें बहोतही मजबूत हो जाते है।पर परिस्थिती तो इसकें विपरीत देखनें को मिलती है।हमें जिम्मेदारीयों का एहसास कम और अधिकारों का और अपनें हक्क का एहसास जादा रहता है।यही कारण है पती पत्नी कें बीच झगडें होनें का।हम यह प्राथमिक बात समझं नहीं सकतें है।हम यह भुल जातें है की हमें अपनें हक्क अधिकार के साथ साथ कुछ कर्तव्यों का भी पालन करना होता है। अगर रिश्तों में झगडें होते है तो हम अपनें पार्टनर को ही कोसते रहते है।हम अपने पार्टनर को ही अपनी गलतीयाँ सुधारनें को कहतें है।पर हम यह भुल जाते है की उसके साथ साथ हमें भी कुछ चेंज करना होता है।हमें भी कुछ बदलाव लानें होते है।अगर हम यह करतें है तो हमारा रिश्ता सात जन्मों तक मजबूत रह सकता है।

७.रिश्तों में शारीरिक सुख,अपेक्षाएँ जादा रखना:

अक्सर यह देखा जाता है की पती पत्नी कें बीच अगर झगडें के कुछ कारण है तो उसमें यह एक कारण प्रमुख कारण है ऐसा शोध में पाया गया है।क्या शारीरिक सुख ही सबकुछ है।क्या हम बगैर शारीरिक सुख कें नही रह सकते है?रह तो सकतेंं है पर हम इसें लेकर रिश्तें भी तोड देते है।क्या शारीरिक सुख रिश्तें सें बढकर है?

देखो शारीरिक सुख या सेक्स एक कुदरत का वरदान है जो हर एक जीव में कुदरत नें डाला है।इसका भरपूर आनंद उठाना चाहीए।पर अगर इसें जबरदस्ती या किसी कें बगैर मर्जी करना यह पाप है।पती पत्नी कें बीच तो किसी की मर्जी है या नहीं यह भी नहीं देखा जाता है।यह बहोतही गलत है।और दुसरी एक वजह यह है की अगर किसी कारण सें अपना या अपनी पार्टनर का मुड ठिक ना हो या अन्य कारणों की वजह सें आपस में इच्छा ना हो तो दोनों में सें कोई एक इसकी अपेक्षा बाहर किसी गैर मर्द या गैर औरत सें करता है तो यह बहोतही गलत है।इसका अंजाम बाद में क्राईम में हो जाता है।यह भी ठिक नहीं है।

८.रिश्तों में एक दुसरें कें ओपीनीयन को महत्त्व ना देना:

रिश्तों में अगर अपना पार्टनर किसी चीज कें बारे में या कोई परिस्थिती के बारें में अपनी राय रखता है तो उसको रिस्पेक्ट करना चाहीए।भलेही आप उस राय सें सेहमत हो या ना हो।हर किसी को अपना ओपीनीयन रखनें का अधिकार है और हर कोई इसें रखता है।तो रिश्तों में उस ओपीनीयन की कद्र होनी चाहीए।

९.रिश्तों में एक दुसरे कें उपर शक करना:

रिश्तों में आजकल एक दुसरें पर शक करना काफी बढ गया है।खासकर पती पत्नी के रिश्तें मे तो इसका प्रमाण बहोत बढ गया है।और शक करना इसलिए बढता है क्यो की अपना पार्टनर अपने पार्टनर को अगर समय नहीं देता है तो भी शक बढ जाता है।अगर आपका पार्टनर या आप अपने पार्टनर सें प्यार स़े बातें नहीं करते हो तो भी शक बढता है।शक बढनें कें बहोत सारे कारण हो सकतें है।इसलिए जो बात शक बढाती है उस बात को आप मत दोहराए यही इसका सोल्युशन है।

१०:रिश्तों में एक दुसरें की तुलना किसी और कें पार्टनर सें करना:

यह बात तो बहोतही गलत है।हम अक्सर अपनें पार्टनर की तुलना किसी और के साथ करतें है।हम किसी भी बात को लेकर यह तुलना करते है।हम अपने पार्टनर की सुंदरता कै लेकर, उसकें सेलरी को लेकर, उसके विचारों को लेकर, उसकें रहनें के ढंग को लेकर तुलना करते रहते है।इसका परिणाम बाद में बढे बढे झगडों में होता है।यह तुलना करना बहोतही गलत है।दुनिया में हर इन्सान स्पेशल है उसकें अपनें अपनें रहनें कें बात करनें के तरिकें अलग अलग और उसके लिए स्पेशल होते है।तो किसी के साथ अपने पार्टनर की तुलना मत किजीए।

११. रिश्तों में एक दुसरे कें रिश्तेदारों पर उंगलीयाँ उठाना:

जब भी पती पत्नी के बीच झगडें और लढाईयाँ होती है तब दोनों भी एक दुसरे कें रिश्तेदारों के उपर उंगलीयाँ उठाते है।यह बिलकुल भी ठिक नहीं है।ऐसा करनेंसें झगडें और जोर पकडतें है।रिश्तेदार तो वह होते है।जो हमारें बुरें समय में वे ही हमें मदत करनें आते है।रिश्तेदारों के वजह सें ही हमारें रिश्तें बनें रहतें है।इसलिए ऐसा करनेंसें बचें।

१२.आमदनी अठनी खर्चां रूपया:

जब हम शादी करतें है तो उसके साथ कुछ जिम्मेदारीयाँ भी आती है।इसलिए पहलें जिम्मेदार बनीये और शादी करें।जिम्मेदारीयों में फायनान्शियल कंडीशन मजबूत होना बहुतही महत्वपूर्ण है।पर होता उलटा है।हमारी इन्कम बिलकुल नहीं होती है और हम शादी करनें को तैयार होते है।अगर कम इन्कम होने के बाद शादी भी कियी तो हम अपने खर्चों के उपर बिलकुल भी नियंत्रण नहीं रखतें है।हम खर्चें बहोत करतें है।और सर पर कर्ज करतें है।यह बहोतही गलत है।इसका सिधा परिणाम हमारें रिश्तों पर होता है।इस बात को ध्यान में लेनें की आवश्यकता है।


तो दोस्तों यह थी कुछ आवश्यक जानकारी।यह जानकारी बहोतही महत्वपूर्ण है।अगर हम इसपर चलतें है तो हमारें रिश्तें कभी भी कमजोर नहीं होंगे बल्की हमेशा मजबूत और अंत तक अच्छे और सच्चे रहेंगें।लेकीन अंत में एक बात कहना चाहुगाँ की यह नियम बहोतही इम्पार्टन्ट है अगर इस नियमों को अपनें जिंदगी में अंमल करतें है तो ही इसकें रिझल्ट आपको देखनें को मिलेंगें।यह नियम सिर्फ पढकें लाइक करकें छोड देनें कें नहीं है।इस नियमों कें उपर आप चलेंगें तो ही आपको बदलाव दिखेंगें।

-किरण चावरे 
मो.9309770054


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