Valentine Day और आजकल के प्यार की अस्सली सच्चाई!इस आर्टीकल को पढकें जानिए की आपका प्यार सच्चा है या झुठा है।
दोस्तों,अगले ही महीनें में 14 फरवरी को सबका पसंदीदा वेलेन्टाइन डे आ रहा है और इसका हम बडें ही बेसबरी सें इंतजार कर रहे है।खासकर के कॉलेज के युवा और लडकीयाँ इस दिन का बहुतही इंतजार करते है।जो लडकें और लडकीयाँ किसीकों पसंद करते है वह इस दिन का इंतजार इसलिए करते है की,अपनें दिल की बात उस अपनी ड्रीम गर्ल को या लडकीयाँ अपनें राजकुमार को बता सकें।क्यों की कहा जाता है की,अगर कोई लडका या लडकी इस वेलेन्टाइन डे के दिन अपने प्यार का इजहार करते है तो वह लडकें को या लडकी को रिजेक्शन नहीं मिल सकता,केवल स्वीकार किया जाता है।ऐसी भावना वेलेन्टाइन डे को लेकर लोगों के दिल में है।इसलिए प्रेमी,आशिक,मजनु इस दिन का इंतजार करते है।
वेलेन्टाइन डे की शुरूवात कैसें हुयी इसका पुर्व ईतिहास:
दोस्तों वेलेन्टाइन डे मुल रूप सें एक वेलेन्टाइन नाम के संत थे उनके नाम सें जाना जाता है।वह संत एक गिरीजाघर कें पादरी थे और वह संत रोम नाम के देश सें आते थे।उनकें काल में यानी की तीसरीं शताब्दी में रोम देश में सम्राट क्लाउडीस् का शासन था।उस सम्राट का मानना यह था की,विवाह करनेंसें पुरुषों की बुद्धी कम हो जाती है इसलिए उस सम्राट ने एक फर्मान निकाला था की मेरे राज्य में कोई भी पुरुष शादी नहीं करेगा।लेकीन यह बात संत वेलेन्टाइन को पसंद नहीं आयी और उन्होंने सम्राट क्लाउडीस् के फर्मान का तीव्र विरोध किया।और बहोत सारे लोगों ने अपनी मर्जीं सें शादी कियी और अपनें प्यार को एक अच्छे रिश्तें का नाम दिया।यह सारी बातें संत वेलेन्टाइन के नेतृत्व में हुयी। सम्राट क्लाउडीस् को यह बात बिलकुल भी पसंद नहीं आयी और उन्होंने नें संत वेलेन्टाइन को 14 फरवरी को फांसी की सजा दियी।
यह था इसका संक्षिप्त में इतिहास।यह बातें हर किसी को पता नहीं होती।पर फिर भी हम यह दिवस मनाते है और इसमें कोई बुरी बात नहीं है।चाहे इस दिन के बारें में हमें पता हो या ना हो,चाहे यह दिन हमारे देश का हो या ना हो पर हम इसे मनाते है।इससे कोई भी फर्क नहीं पडता की यह जो त्यौहार है उसका इतिहास किस देश का है।क्यों की प्यार एक ऐसी चीज है जो दुनिया में कही भी एक जैसी है।इस प्यार को दुनिया की सिमाएँ कभी तोड नहीं सकती।प्यार एक कालातीत चीज है।इस प्यार को देश,रंग,रूप,जाती,धर्म, उम्र की सीमा कभी भी तोड नहीं सकती।यह अजरामर चीज है जो इतिहास में भी थी,वर्तमान में भी है और भविष्य में भी यह अमर रहेगी।इतिहास में भी बडें बडें राजा महाराजांओं नें प्रेम किया है।अगर हम इतिहास को पढते है तो हमें बहोत सारे अजरामर उदाहरण पढनें को मिलते है।
ऐसेही उदाहरणों पर और उनके केरेक्टर पर हिंदी में और पाश्चात्य देशों में भी फिल्में भी आयी है।जैसे लैला मजनु, मुमताज शहाजहाँ,सोनी महीवाल,दिलवाले दुल्हनियाँ लें जाएंगे। और विदेशों मे बहुतही बहुचर्चित फिल्म टायटॅनिक आयी थी जो एक सच्ची घटना के उपर आधारित थी।वह फिल्म भी दुनिया में बहोत देखी गयी।आज भी इस फिल्म को देखा जाता है।उस फिल्म ने बहोत सारे आँस्कर अवाँर्ड जिते थे।क्यो वह फिल्म एक बहुतही सुंदर और अदभूत कलाकृती थी और खास बात यह है की यह फिल्म लोगों सें इसलिए पसंद कियी गयी की प्यार करनेवालें लोगों की संख्या दुनिया में बहोत है।दुनिया का हर एक आदमी इस प्यार के दौर सें गुजर चुका है इतनी बेहतरिन और लाजवाब चीज है यह प्यार।क्यों की हर किसी के दिल में एक लडकी और एक लडकें का खयाल रहता है।
हाँ खयाल हो ना तो अच्छी बात है पर क्या सिर्फ खयाल होनें सें ही सबकुछ होता है?नहीं! खयाल होना अलग बात है और उसका इजहार करना अलग बात है।
प्रेम का सही अर्थ सही मतलब:
प्रेम एक ऐसी भावना है जो बहुतही पवित्र और अमर है।प्रेम सुंदरता और उसकी गहराई आजतक किसीनें भी नहीं देखी।प्रेम एक विशाल महासागर की तरह है।जिस महासागर में दुनिया की सब नदीयाँ आकर मिलती है ठिक उसी तरह प्रेम में सारी निगेटिव्ह बातें,गुस्सा,घमंड,अहंकार, द्वेष भावना सबकुछ आकर प्रेम के सामने विलीन हो जाते है और अंत में सिर्फ प्रेम रह जाता है।प्रेम में सिर्फ त्याग है,प्रेम सिर्फ पवित्रता है,प्रेम में एक आंतरिक शक्ती और एक समाधान है,प्रेम एक गुणकारी औषधी है,प्रेम एक नया और पुनर्जन्म देनेवाली भावनाओं का अध्यात्मिक योग है।प्रेम एक जिंदगी जिनें की उम्मीद जागनेवाली एक बहुतही खुबसुरत और प्राकृतिक देन है।प्रेम एक विश्वास है।प्रेम एक ताकत है।प्रेम एक नयी जिंदगी जिनें का खुबसुरत अवसर है।प्रेम दो शरीर के साथ साथ दो सुंदर आत्माओं का खुबसुरत मिलन है।प्रेम एक बहुतही स्वाभाविक बात है जो कियी नहीं जाती जो आपनेआप स्वंयम हो जाती है।हमें इसका पता भी नहीं चलता और यह हो जाता है।यह भगवान की दियी हुयी सबसे खुबसुरत देन है।हम बगैर प्रेम के एक पल भी नहीं रह सकतें।चाहे वह प्रेम प्रेमीयों का हो या अपनी माँ बाप,बहन भाई का हो या मित्रता का हो।अगर इस रिश्तें में प्रेम हो तो ही हम अपनी जिंदगी अच्छी जी सकते है। हम बगैर प्रेम के कुछ भी नहीं है।जिंदगी में प्रेम ही सबकुछ है।
क्या प्रेम की इस खुबसुरत और सटीक व्याख्या,परिभाषा सें आजकल का प्रेम खरा उतरता है:
तो इसका जवाब हाँ और ना दोनों में है।क्यो की आजकल के प्यार की परिभाषा पुरी तरह बदल चुकी है।आज हम सब किसी न किसी सें प्यार करतें है।अगर कोई नहीं भी करता है तो प्यार की उम्मीद तो करता ही है।बोलने का अर्थ सिर्फ इतना ही है की हर कोई प्यार करता है और उसकी उम्मीद भी करता है।प्यार करनें के लिए क्या कोई बातें जरुरी है?आईये हम देखतें है की आजकल के प्रेम की वास्तविकता।
क्या प्यार करने के लिए पैसा,धन,दौलत, रंग,जाती,धर्म, मजहब कुछ मायने रखता है? अथवा..
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या उसके विपरीत प्यार करनें के लिए विश्वास, समय,त्याग,सच्चाई,चारित्र्य शारीरिक मिलन, प्रामाणिकता अपनेपन का एहसास जरूरी है?
क्या महत्वपुर्ण है दोनों में सें? इस सवाल का जवाब हर किसी का अलग हो सकता है पर जवाब अलग होनें से प्यार की सच्चाई तो बदली नहीं जाती।प्यार को हम किस नजरियें सें देखते है यह बात बहुतही महत्वपूर्ण है उसके उपर ही हमारें प्यार का भविष्य है।अगर हम प्यार करते है तो उसका भविष्य किस बात पर निर्भर है यह जानना हमारें लिए सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिकता के तौर पर मुलभूत बात है।अगर हम इस दोनों बातो को नहीं समझ लेते है तो हम प्यार करनें में पुरी तरह असफल रहेंगें।यह बात पहले समझना होगा।हम बगैर जानें प्यार में पडते है और अंतमें परिणाम स्वरूप हमें असफलता मिलती है और उसके बाद हम अपने नशीब को दोष देते रहते है।
प्यार में विश्वास, प्रामाणिकता,त्याग जिम्मेदारीयों का एहसास एक दुसरें का रिस्पेक्ट,चरित्र इसके आगे पैसा,धन,दौलत,अमीरीं,गरिबी इसकी कोई किमत नहीं होती:
दोस्तों आजकल हम देखतें है की, बगैर धन दौलत, बगैर पैसों की सिवाय प्यार दिखता ही नहीं है।निस्वार्थ भांव सें प्यार करनेवाली व्यक्ती हमें आजकल के जमानें में धुंडकर निकालना बहुतही मुश्कील है।आज के वर्तमान में सिर्फ इतना ही देखा जाता है की पैसा।चाहे वह पैसा किसी भी गलत तरिकेसें कमाया हो।चाहे कोई भी गलत काम कर के कमाया हो।अगर उस पैसों सें वह अमीर बनता है या दिखता है तो लडके या लडकीयाँ बाद में यह नहीं देखती की उसके पास एक अच्छा चारित्र्य है या नहीं।उसके पास प्यार करनें के लिए एक अच्छा दिल है या नहीं।उसके पास जिंदगी जिनें के लिए अच्छा नजरियाँ है या नहीं।उसके पास अच्छे विचार है या नहीं।उसके पास प्रामाणिकता है या नहीं।
हम इस दिखावटी को देखकर बाकी के सारी बातों का अनदेखा करते है।और अंततः हमें सिर्फ पश्चतावा भुगतना पडता है।क्यों की प्यार करते वक्त हमनें क्या देखा? हमनें प्यार करते वक्त सिर्फ बाहरी सुंदरता देखी है।जो बहुतही टेंम्पररी और थोडे समय के लिए रहती है और जो चिरकाल टिकनेवाली सुंदरता है जैसे प्यार, विश्वास, प्रामाणिकता,सच्चाई इस अस्सली सुंदरता को हम अनदेखा करते है और उसके परिणामस्वरूप हमें असफलता और दुख ही मिलता है।
हम यह सब कुछ जानतें हुए भी ऐसा क्यों करते? है इसका जवाब है-लोगों को इम्प्रेस करनें के लिए।
हाँ लोगों को प्रभावित करनें के लिए हम बाहरी सुंदरता की ओर आकर्षित होते है।यही आजकल के रिश्तें की सच्चाई है।हम प्यार करते वक्त पैसा धन,दौलत, अमीरीं देखकर प्यार या शादी करते है और बाकी के सभी अच्छे गुणों को हम अनदेखा करते है।और यह सब हम खुदके समाधान के लिए और उससे भी जादा लोगों को आकर्षित करने के लिए करते है।चाहे उस रिश्तें में हम सुखी हो या ना हो पर लोग हमारी अमीरी देखकर प्रभावित होते है उतना ही काफी है।
क्या लोगों को प्रभावित करनें के लिए हमारा जन्म हुआ है?
प्यार में हम कितनें समाधानी और सुखी है यही बात सबसे महत्वपूर्ण है।हम लोगों का इतना जादा विचार क्यों करते है।क्यों की हमें लगता है की अगर लोग हमारी अमीरी देखकर,हमारा पैसा,गाडी,बंगला देखकर प्रभावित होते है तो इसमें भी एक अलग तरह का सुख है ऐसा लोगों का लगता है और वह अंदर ही अंदर सुख की भावना का उपभोग लेते है।पर वे यह नहीं जानते है की ऐसा सुख बहुतही कम समय में खत्म हो जाता है।ऐसें सुख का कोई भी भविष्य नहीं होता है।पर फिर भी हम लोगों कों इम्प्रेस करने के लिए बनावटी रिश्तें निभाते रहतें है।और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की,हम उनं लोगों का विचार करतें है जो हमारें दुख में कोई भी नहीं आता है।उनकी परवा करके हम अच्छें रिश्तें छोडकर बनावटी और बाहरी सुंदरतावाले रिश्तें को अपनाते है।
प्रेम में विश्वास ही सबकुछ है:
आजकल के रिश्तें में विश्वास का बहोत बडा अभाव है।आजकल तो प्यार की परिभाषा ही बदल गयी है।प्रेमीयों का खुबसुरत रिश्ता हो या पती पत्नी का रिश्ता हो उसमें विश्वास का अभाव बढता जा रहा है।पती पत्नी का रिश्ता तो इतना पवित्र और महत्वपूर्ण है की उस रिश्तें को शब्दों में नहीं बताया जा सकता है।फिर भी ऐसें खुबसुरत रिश्तें में विश्वास का अभाव बढता जा रहा है जो की बहुतही चिंताजनक बात है।आजकल पती पत्नी के बीच लढाईयाँ,झगडे होते है और इसकी वजह सिर्फ विश्वास का अभाव है। रिश्तें में अपना जीवनसाथी अपन पती होते हुए भी बीवीयाँ बाहर अफेअर्स रखती है।इसमें पुरुष वर्ग भी पिछें नहीं है।अपनी खुबसुरत बीवी होनें के बावजूद भी पुरुष बाहर और गैरऔरतों के साथ संबंध रखतें है।इसकी मुख्य वजह यह है की रिश्तों की कदर ना करना।
हम रिश्तों की किमत क्यों नहीं समझ पातें है।हम क्यों लंबे समय तक रिश्तों की कदर नहीं कर पातें है?हमें रिश्तें क्यों बोअर हो जाते है:
इसका जवाब है हमारा मन।जो की एक बहुतही चंचल है और उसके उपर हमारा बिलकुल भी नियंत्रण नहीं है।और इसकी भी एक वजह है हम अनगिणत अपेक्षाएँ करते है।और वह भी हम गलत लोगों सें अपेक्षाएँ करते है।हम जिंदगी को लेकर बिलकुल भी गंभीर या सिरीयस नहीं है।क्यों की हमें जिंदगी का अस्सली अर्थ ही समझ में नहीं आया है।हम सिर्फ आज की सोचते है।हम अपने आनेवाले कल को पुरा नजरंदाज करते है और एक झुठे रिश्तें को आगे लेकर जाने की कोशीश करते है।जो की आगे चलकर बहुतही खतरनाक साबित हो सकता है।
हम बोअर इसलिए भी होते क्यों की हमें अपनों सें मिलनेवाले प्यार एक तो जादा हो जाता है,नहीं तो कम ह़ जाता है।नहीं तो हमारें प्यार करने का अंदाज बदल जाता है।तो इस वजह सें हम यह सब चीजें बाहर धुंडते है।हम अपने घर में रिश्तें होने के बावजूद भी बाहर इसलिए रिश्तें धूंडते है क्यों की बाहर की दुनिया हमें जल्दी आकर्षित करती है और बाहर की दुनिया हमें इसलिए आकर्षित करती है क्यों की उस दुनिया को,लोगों को हम बहुतही कम समय के लिए देखा होता है।इसलिए कम समय में देखा हुआ कोई भी व्यक्ती हमारा मन जादा जल्दी खिंच लेता है।जैसे बाहर के लोग।और दुसरी ओर हमारे अपनें रिश्तें हमारा पती,बॉयफ्रेंड आपसे सच्चा प्यार करनेवाला व्यक्ती यह हमेशा अपने साथ होते है। इसलिए यह उनसे भी जादा आकर्षित और हमें सच्चा प्यार देनेवाले व्यक्ती को हम बाहर के लोगों के लिए भुल जाते है।और बाद में इसका परिणाम इसका अंत बहुतही भयानक होता है।
यह एक बहुतही गंभीर और चिंताजनक परिस्थिती है।आज विश्वास के अभाव के कारण आज वर्तमान में हजारों,लाखों रिश्तें, शादीयाँ टुट रही है।इसका मुख्य कारण है आत्मविश्वास अभाव।आज भारतीय न्यायालयों में तलाख,डिवोर्स कें लाखों के मुकदमें चल रहे है।रोज हजारों कपल्स डिवोर्स करके अलग हो रहे है।यह किस बात का संकेत है।यह संकेत हमें यह दर्शाता है की कपल्स के बीच विश्वास, प्रामाणिकता,चारित्र्य का अभाव।
पती पत्नी,प्रेमी के बीच शारीरिक मिलन,सेक्स का महत्त्व:
आजकल हम देखतें है की पती पत्नी और खासकर प्रेमी युगुल में सेक्स का बहुतही जादा आकर्षण बढ रहा है।शादी के पहले कपल्स सेक्स कर रहे है और इसका परिणाम आगे चलकर सिर्फ लडकी को भुगतना पडता है।क्या रिश्तों में सेक्स की वजह सें लढाईयाँ, झगडें होना रिश्तों के भविष्य के लिए अच्छी बात है।आजकल के रिश्तों में जादातर लडकें अपने पार्टनर सें सेक्स की मांग करते है।अगर दोनों कें आपसी सहमती सें सेक्स किया जाता है तो यह बहुतही स्वीकार्य है।पर सिर्फ लडकें से ही उसकी मांग हो रही है और लडकीयाँ ना कहती है तो लडकें ने भी जीद्द नहीं करनी चाहीए।पर आजकल के लडके इसके विपरीत बर्ताव करते है।कुछ लडकें ऐसें भी है जो लडकी के मना करनें सें केवल सेक्स के लिए किमती रिश्तें तोड देते है।
क्या सेक्स इतना महत्वपूर्ण है।जिसके आगे हम अपने रिश्तें तोड देते है।बिलकुल भी नहीं।सेक्स सें बढकर रिश्तें है।हम बिना सेक्स किये भी जिंदगी जी सकते है।पर बिना रिश्तें के हम अपनी जिंदगी जी नहीं सकते है।आज समाज में हम देखते है एक्स्ट्रा मेरिटल अफेअर्स का प्रमाण बहुतही बढ रहा है और इसका मुख्य कारण है कपल्स के बीच सेक्स को लेकर समाधान ना होना।
हाँ..जिंदगी मे़ सबकुछ इम्पाँँर्टन्ट है रिश्तें भी सेक्स भी।सेक्स तो एक कुदरत की बहुतही अनमोल देन है।जो हर एक प्राणीमात्रा में कुदरत ने डाली है।ठिक वैसेहीं प्रेमीयों के बीच,पती पत्नीयोंं के बीच भी सेक्स का पवित्र वरदान कुदरत ने डाला है।सेक्स कपल्स को अपने जोडीदारों को रिश्तों में बांधकर रखता है।सेक्स रिश्तों को करिब रखता है।कुदरत नें पती पत्नी के बीच लगाव रहना चाहीए इसलिए यह वरदान दिया है।पर आजकल इसे अपने पार्टनर को छोडकर बाहर जाकर जाकर अपनी संतुष्टी देख रहे है।जो की बहुतही धोकादायक और चिंतनशील है जिसका परिणाम बहुतही भयावह होते हम देख रहे है।
रिश्तों में समय और वक्त का महत्त्व:
रिश्तों में वक्त की किमत अनन्यसाधारण है।अगर हम अपनें किमती रिश्तों को सांभालनें के लिए,अपनें जीवनसाथी को प्यार देने के लिए वक्त नही निकाल सकते है तो वक्त दोनों में से रिश्ता निकाल देगा।यह सच्चाई है जो हमें बहुतही गंभीरतापुर्वक तरिकेसें लेनी चाहीए।अगर हम एक दुसरें को वक्त नहीं देते है तो उसके साथ साथ हम प्यार भी देते है।उसके साथ साथ हम अपने जीवनसाथी का विश्वास भी जीत लेते है।इतनी ताकत वक्त में है।अगर हम किसी को वक्त देते है तो हम उस इंसान को अपनी जिंदगी देते है।
अगर किसी रिश्तें में कोई एक व्यक्ती वक्त देनें के लिए बहानें बनाता है। रोज अलग अलग तरिकेसें बहाणे बनाता है तो समझों उस व्यक्ती का मन भर गया है।और जीस व्यक्ती का रिश्तों में मन भर जाता है वह व्यक्ती कोई अन्य रिश्तें भी नहीं निभा सकता।उस व्यक्ती को रिश्तें खिलोनें की तरह लगते है।वह कभी भी किसी की भी जिंदगी में जाते है और कभी उनकी जिंदगी से निकल जाते है।ऐसे व्यक्ती रिश्तों के लिए बहुतही घातक साबित होते है।
जिस व्यक्ती को रिश्तों की सच में अहमियत होती है वह व्यक्ती वह इन्सांन चाहे लाख दिक्कते आए,चाहे लाख गुणा बिझी या व्यस्त हो वह अपने रिश्तों के लिए वक्त निकालेगा।अगर वह बहाने बना रहा हो तो वह व्यक्ती बाकी के रिश्तें का तो पता नहीं पर पती पत्नी या प्रेम जैसै रिश्तों को कभी भी आगे लेकर नही जाएगा।ऐसे व्यक्ती का आगे चलकर कोई नहीं होता है।यह व्यक्ती सच्चे प्यार के लिए तडप उठता है।और उस व्यक्ती को पहलेवाले दिन याद आते है।
रिश्तों में Intention मकसद का अनन्यसाधारण महत्त्व:
रिश्तों में कभी कभी ऐसा दौर आता है की,झगडे तणाव की परिस्थितीयाँ आती है।इसके भी अलग अलग कारण है।इसकी वजह सें अपनें पार्टनर को गुस्से में बोल सकता है।लेकीन अपनें पार्टनर कें गुस्सा करने का मकसद Intention अच्छा हो तो कभी भी उसके गुस्से में बोले हुए शब्द को पकडना नहीं चाहीए।क्यों की गुस्सा वही करता है जिसके मन में आपके प्रती अपनें पार्टनर या आपके जीवनसाथी के प्रती प्यार होता है और वह उसी हक्क से,उसी अधिकार सें एक अच्छे मकसद सें बोलता है।
पर हम जादातर उसके बोलनें और गुस्सा होनें का मकसद भुल जाते है और उसके शब्द पकडकर हम उसका इशु बनातें है।अगर कोई यह कहकर गुस्सा करता है की मेरी लाईफ सें चले जाओ तो इसके पिच्छे मकसद तुम्है छोड देने का है।वह तुमसें छुटकारा पाना चाहता है।और इसिलिए वह तुम्हे भदी गालीयाँँ दे रहा है।
और ठिक उसके विपरीत कोई व्यक्ती अपने जीवनसाथी को यह कहकर गुस्सा कर रहा है की मेरी जिंदगी में तुम्हारी बहुतही अहमीयत है।मै बहुतही अपने दिल सें आपसे प्यार करता हुँ।उसे पानें के लिए उसनें अपने प्यार को प्रुव्ह करके दिखाया हो,उसें पानें कें लिए उसनें स्ट्रगल किया हो,उसें पानें के लिए वह अपनें जिंदगी के फैसलें उसको ध्यान में रखकर लेता हो और भी बहुत कुछ उसें पानें के लिए उसनें किया हो और फिर भी उस सामनेवाले व्यक्ती को कदर ना हो तो उसका गुस्सा होना जायज है।क्यों की उसनें उस व्यक्ती को पानें के लिए बहोत सारा स्ट्रगल किया है।इसलिए उसका Intention भी अच्छा होगा यह बात और अलग तरिकेसें साबित करनें की जरूरत नहीं।अगर कोई इतना करनें के बावजूद भी रिश्तें में वह आपकी कदर नहीं कर रहा है तो उस रिश्तें सें दुर चले जाना ही हमारें लिए बेहत्तर है।ऐसें व्यक्ती को आनेवाला वक्त ही सबक सिखायेगा।क्यों की आपकी बदुआ ऐसेही नही जाएगी। बेहत्तर है आप ही उनकें लाईफ सें चले जाओ।क्यों की वक्त ही सबकुछ है।जिसे सच्चा प्यार करनें के बावजूद भी आपकी कद्र नहीं उस इन्सान को वक्त ऐसा रूलाएगा की उस इंसान सें जुडे हुए लोग भी उसका शिकार हो जाते है।ऐसा इंसान अपने साथ साथ अपनें घरवालों को भी दुखी करता है।यह किसी के साथ धोका करनेका,किसी का मन ना समझनें का परिणाम है और उसें वह परिणाम भुगतना ही पडेगा।
इसलिए इन सारी चीजो को ध्यान में रखकर हम अपना वेलेन्टाइन डे मनाए।क्यो जिंदगी सिर्फ एक ही बार है बार बार नहीं।इसे अच्छी तरिकेसें जियें। सच्चे रिश्तों का ही महत्त्व दे।बाहरी सुंदरता के जाल में मत फंसे।बाहरी सुंदरता की उम्र बहुतही अल्प होती है।रिश्तों में सेक्रीफाईस बहुत महत्वपुर्ण है।अपने ही रिश्तों में इंटरेस्ट बनाए रखे। तभी हमारी जिंदगी सुखी और संपन्न होगी।नही तो घुट घुट के मरना तय है।
-किरण चावरे
Wow very beautiful article for lovers as well as for all
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